“बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष दिनेश पटेल ने कहा “रोजगार, किसान और महिलाएं फिर उपेक्षित”
भिलाई नगर 26 फरवरी 2026:- वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को सात स्तंभों के संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसे “विजन डॉक्यूमेंट” बताया गया है। परंतु वास्तविकता में यह संकल्प आम जनता के लिए केवल खोखले वादों का पुलिंदा साबित होता दिखाई दे रहा है।

सरकार एक ओर “समावेशी विकास” की बात करती है, वहीं दूसरी ओर लगातार महंगाई बढ़ रही है। आम जनता की आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, बिजली और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि हो रही है, टैक्स में कोई ठोस राहत नहीं दी गई है। ऐसे में समावेशी विकास की बात करना जनता को झूठे सपने दिखाने जैसा प्रतीत होता है।
आर्थिक विकास के नाम पर सड़क, सिंचाई, बिजली, शहरी विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार की बातें की गई हैं। वित्त मंत्री के अनुसार प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय लगभग 1,62,900 रुपये बताई गई है, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार औसत प्रति व्यक्ति कर्ज लगभग 4,80,000 रुपये के आसपास है। यह स्थिति प्रदेश की आर्थिक सेहत पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
बजट में वर्ष 2026-27 के लिए अनुमानित राजस्व 1.43 लाख करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि व्यय 1.45 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। अर्थात लगभग 2,000 करोड़ रुपये का सीधा घाटा प्रस्तावित है। ऐसे में कमाई से अधिक खर्च की स्थिति में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त कर्ज लेना ही विकल्प बचेगा। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य पर वर्ष 2025-26 के अनुसार लगभग 98,797 करोड़ रुपये का कर्ज बताया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
रोजगार के मोर्चे पर स्थिति और भी निराशाजनक है। उद्योग और निवेश की बातें की जा रही हैं, परंतु जमीनी स्तर पर कई उद्योग बंद हो चुके हैं या निजी हाथों में चले गए हैं। न तो नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं और न ही युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिल पा रहा है। किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए बजट में कोई ठोस और प्रभावी प्रावधान नजर नहीं आता।
“नई दिशा, नई धार और नई रफ्तार” जैसे नारों के माध्यम से जनता को आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, लेकिन वास्तविक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट हो जाएंगे। आगामी एक वर्ष में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार महंगाई कम करने, रोजगार सृजन करने, नए उद्योग स्थापित करने, सिंचाई के साधनों का विस्तार करने और किसानों व महिलाओं को वास्तविक लाभ पहुंचाने में कितनी सफल होती है।
कुल मिलाकर यह बजट जनहित से अधिक दिखावे पर आधारित प्रतीत होता है और आम जनता को बड़े सपने दिखाने का प्रयास है। आने वाला समय इसकी सच्चाई सामने लाएगा।



