101 हथियारों के साथ 44 महिलाओं सहित 108 माओवादियों का समर्पण 1 किलो सोना और 3.60 करोड़ नगद की रिकॉर्ड बरामदगी….
जगदलपुर 11 मार्च 2026 :- आज 11 मार्च 2026 (बुधवार) को बस्तर संभाग मुख्यालय, जगदलपुर में पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के अंतर्गत DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के 108 माओवादी कैडर, समाज के वरिष्ठ जनों, पुलिस /केंद्रीय सुरक्षा बलों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए।

101 हथियारों के साथ 108 माओवादियों का समर्पण 1 किलो सोना और 3.60 करोड़ नगद की रिकॉर्ड बरामदगी
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के अंतर्गत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 108 माओवादी कैडरों ने जगदलपुर में सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिलाएँ और 64 पुरुष शामिल हैं।

इन सभी पर कुल 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। विभिन्न जिलों से आए इन नक्सलियों में बीजापुर से 37, दंतेवाड़ा से 30, सुकमा से 18, बस्तर से 16, नारायणपुर से 4 और कांकेर से 3 शामिल थे।
इस सरेंडर के साथ ही सुरक्षा बलों (छत्तीसगढ़ पुलिस, CRPF, COBRA आदि) को अब तक की सबसे बड़ी नक्सली डंप बरामदगी मिली है। सरेंडर करने वाले कैडरों की निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से बरामद सामग्री में शामिल हैं:



यह बरामदगी नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इसे क्षेत्र की बदलती तस्वीर बताया और जोर दिया कि यह पहल केवल हथियार छुड़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
108 माओवादी कैडरों का सामूहिक आत्मसमर्पण और उसके साथ जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामदगी स्पष्ट संकेत देती है कि नक्सल संगठनों की आर्थिक और सैन्य ताकत अब टूटने की कगार पर है।
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की समय-सीमा से महज 20 दिन पहले यह उपलब्धि ‘नक्सल मुक्त भारत’ के लक्ष्य को वास्तविकता के निकट ला रही है। ‘पूना मारगेम’ जैसी पुनर्वास नीतियाँ “जो हिंसा छोड़ने वालों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान का आश्वासन देती हैं, सिद्ध कर रही हैं कि विकास और संवाद बल प्रयोग से अधिक प्रभावी हथियार हैं।


दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 108 माओवादी कैडरों का समाज की मुख्यधारा मे वापसी, जिनमें से 44 महिला माओवादी कैडर शामिल हैं।108 माओवादी कैडरों पर 3.29 करोड़ रुपयों का इनाम घोषित है।
पूनर्वास करने वाले माओवादी कैडरों से प्राप्त सूचना तथा अन्य आसूचना के आधार पर सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई करते हुए AK-47, INSAS, LMG, BGL सहित कुल 101 घातक हथियारों की बरामदगी विभिन्न डम्पों से की गई, जो नक्सल विरोधी अभियानों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
देश के नक्सल विरोधी अभियान की इतिहास में एक ही स्थल से सर्वाधिक रुपया 3.61 करोड़ की नगदी रकम तथा रुपया 1.64 करोड़ मूल्य का 01 कि.ग्रा. सोना माओवादियों द्वारा की गई डम्प से बरामद की गई।
“पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन” की पहल से प्रभावित होकर छ.ग. राज्य में विगत 26 महिनों में कुल 2714 माआवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ कर शांति पूर्ण एवं सामाजिक जीवन हेतु अग्रसर हुए।
उल्लेखनीय है कि बस्तर संभागांतर्गत 01 जनवरी 2024 से लेकर 09 मार्च 2026 तक की अवधि में कुल 2625 माओवादी कैडरों ने पुनर्वास से पुनर्जीवन का मार्ग अपनाया है।
दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के पश्चिम बस्तर डिवीजन के DVCM राहूल तेलाम, पण्डरु कोवासी एवं झितरु ओयाम, पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी के DVCM रामधर उर्फ बीरु, उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के DVCM मल्लेश, PLGA बटालियन नं. 01 CYPC कमांडर मुचाकी, आंध्रा ओडिशा बार्डर (AOB) के DVCM कोसा मण्डावी जैसे प्रमुख नक्सल कैडर ने माओवादी संगठन के औचित्यहीनता एवं अंत को स्वीकारते हुए राष्ट्र की मुख्यवारा में लौट आये।
मुख्यधारा में लौट आये माओवादी कैडर्स के पुनर्वास, सुरक्षा एवं सम्मानजनक जीवन के लिए अवसर प्रदान कर उन्हें समाज में अंगीकृत करने हेतु भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों के अनुरुप सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं।
माओवादियों के डम्प से 07 नग AK-47, 10 नग INSAS रायफल, 05 नग SLR रायफल, 04 नग LMG रायफल, 20 नग 303 रायफल, 11 नग BGL लांचर्स सहित कुल 101 हथियार बरामद कर वर्तमान में कमजोर हो चुके माओवादी संगठन के सैन्यबल क्षमता को गहन आघात पंहुचाया गया है।
बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित शौर्य भवन, पुलिस कोआर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में आज “पूना मारगेम पुनर्वास से पुनजीवन” पहल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) से जुड़े कुल 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया।
यह कार्यक्रम समाज के वरिष्ठ जनों, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के परिवारजनों, पुलिस महानिदेशक छ.ग. अरुण देव गौतम , अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्स अभि) विवेकानंद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बीएसएफ सिवांग नामग्याल , पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी., पुलिस महानिरीक्षक सीआरपीएफ शालीन., पुलिस महानिरीक्षक छसबल बी. एस. ध्रुव ., बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के पुलिस अधीक्षकगण, केंद्रीय सुरक्षा बलों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।









