निकाय चुनाव में जीत की राह को आसान बनाने वार्डवार जुटाये जा रहे हैं सामाजिक वोट बैंक, समाज में पकड़ रखने वालों को काँगे्रस और भाजपा कर रही है चिन्हित

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भिलाईनगर। भिलाई समेत रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगम व जामुल नगर पालिका चुनाव में दोनों ही राष्ट्रीय पार्टी अपने प्रत्याशियों के जीत की राह को आसान बनाने सामाजिक वोट बैंक को साधने की कोशिश में है। इसके लिए अपनी पार्टी में मौजूद अलग-अलग समाज के नेताओं को चिन्हित किया जा रहा है। इसके अलावा चारों निकाय से वार्डवार सामाजिक वोट बैंक का आंकड़ा जुटाया जा रहा। इस आंकड़े के साथ अपने समाज में लोकप्रिय नेताओं को अलग-अलग वार्ड में उतारा जाएगा।


काँग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी इस निकाय चुनाव में समाज प्रमुखों की अहमियत को महत्व दे रही है। अपनी पार्टी के वार्ड प्रत्याशियों की जीत के लिए अलग-अलग समाज के अध्यक्ष सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काबिज सामाजिक नेताओं पर डोरे डाले जा रहे हैं। इस दौरान समाज को खुश करने का प्रयास करते हुए विकास संबंधी माँगों को भी आने वाले समय में पूरा करने का आश्वासन राजनीतिक दल के प्रतिनिधि देने से चूक नहीं रहे हैं। राजनीतिक दल के नेताओं को लगता है कि समाज के बड़े पदों पर बैठे लोगों के माध्यम से उनके सामाजिक वोट बैंक को साधा जा सकता है। इसके लिए काँग्रेस और भाजपा अपनी पार्टी के मौजूदा बड़े नेताओं को माध्यम बना रही है।


भिलाई शहर की पहचान मिनी इंडिया के रूप में रही है। यहां पर अलग- अलग प्रांत और समाज के लोगों की बहुलता के चलते यह पहचान बनी है। मिनी इंडिया की इस पहचान से रिसाली, भिलाई-चरोदा और जामुल निकाय क्षेत्र भी अछूता नहीं है। लिहाजा चार निकाय में हो रहे चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के रणनीतिकार सामाजिक वोट बैंक को साधने की कोशिश शुरू कर चुके हैं। इसके लिए दोनों पार्टी अपने नामचीन और मतदाताओं में लोकप्रिय नेताओं को चुनाव मैदान में उतारने जा रहे हैं।


गौरतलब रहे कि 70 वार्ड वाले भिलाई नगर निगम में अन्य प्रदेश के मूल निवासियों की निर्णायक आबादी है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ मूल के अलग-अलग समाज से ताल्लुक रखने वाले मतदाताओं की संख्या भी कोई कम नहीं है। रिसाली व भिलाई-चरोदा नगर निगम और जामुल नगर पालिका के ज्यादातर वार्ड में भी अलग-अलग समाज के मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं। कांग्रेस और भाजपा को इस बात का पूरा अहसास है। इसलिए सामाजिक वोट बैंक को अपने पक्ष में साधने की कोशिश दोनों पार्टी की रणनीति में शामिल कर लिया गया है।


बताया जा रहा है कि काँग्रेस और भाजपा ने अपने स्थानीय और प्रदेश स्तर के नेताओं में से कुछ को चिन्हित कर लिया है। इसके अलावा दूसरे प्रांत के स्थानीय मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उनके मूल प्रदेश के लोकप्रिय नेताओं को चुनाव प्रचार के लिए बुलाने की तैयारी दोनों ही राष्ट्रीय पार्टी की ओर से की जा रही है। मसलन यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा और आन्ध्रप्रदेश के नामचीन नेताओं को उन प्रदेशों से ताल्लुक रखने वाले मतदाताओं की बहुलता वाले वार्ड में चुनाव प्रचार कराया जाएगा।


काँग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी इस निकाय चुनाव में समाज प्रमुखों की अहमियत को महत्व दे रही है। अपनी पार्टी के वार्ड प्रत्याशियों की जीत के लिए अलग-अलग समाज के अध्यक्ष सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काबिज सामाजिक नेताओं पर डोरे डाले जा रहे हैं। इस दौरान समाज को खुश करने का प्रयास करते हुए विकास संबंधी माँगों को भी आने वाले समय में पूरा करने का आश्वासन राजनीतिक दल के प्रतिनिधि देने से चूक नहीं रहे हैं। राजनीतिक दल के नेताओं को लगता है कि समाज के बड़े पदों पर बैठे लोगों के माध्यम से उनके सामाजिक वोट बैंक को साधा जा सकता है। इसके लिए काँग्रेस और भाजपा अपनी पार्टी के मौजूदा बड़े नेताओं को माध्यम बना रही है।


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