भिलाईनगर। यहाँ शिवानंद योग निकेतन नेहरू नगर के तत्वाधान में कृष्णा पब्लिक स्कूल नेहरू नगर भिलाई में जारी रामकथा का दूसरा दिन प्रभु श्रीराम के जन्म की कथा और चारों भाइयों के नामकरण की कथा का श्रवण भक्तों ने किया।
उल्लेखनीय है कि निकेतन की ओर से विगत 15 वर्षों से श्री रामकथा का आयोजन प्रतिवर्ष किया जा रहा है। इस वर्ष कृष्णा पब्लिक स्कूल में कथा व्यास पं. नीलमणि दीक्षित (नित्य सत्संग मंडल, दमोह, मध्यप्रदेश) के श्रीमुख से कथावाचन किया जा रहा है। कृष्णा पब्लिक स्कूल, नेहरू नगर एक ऐसा शिक्षण संस्थान है जो हमेशा ही भारतीय संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण व विकास हेतु प्रयत्नशील रहा है। उसी परंपरा को बनाए रखते हुए पाँच दिवसीय इस कार्यक्रम का एमएम त्रिपाठी, चेयरमेन कृष्णा ग्रुप के मार्गदर्शन में कृष्णा पब्लिक स्कूल नेहरू नगर भिलाई में रामकथा का दूसरा दिवस अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक सफल रूप से संपन्न हुआ। शुभारंभ पर संस्कृत के प्रकाण्ड पंडित सतीश त्रिपाठी के मंत्रोच्चारण के साथ एमएम त्रिपाठी, पं. नीलमणि दीक्षित दमोह (म.प्र.) तथा संस्था के सभी गणमाण्य अतिथियों ने सरस्वती माता के तैल चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित किया। तत्पश्चात गोपीकांत गोस्वामी ने सपत्नीक रामचरित मानस का ग्रंथ पूजन किया।
शिवानंद योग निकेतन संस्था के कार्यकर्ता ओम प्रकाश गुप्ता, जगदीश तिवारी और जीपी दुबे ने पं. नीलमणि दीक्षित व एमएम त्रिपाठी का माल्यार्पण कर व पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। इस दौरान भक्तगणों ने कथा व्यास पंडित नीलमणि दीक्षित नित्य सत्संग मंडल दमोह के श्रीमुख से भक्तगण श्रीराम कथा का आलौकिक आनंद प्राप्त किए। जिसमें उन्होंने प्रवचन व गायन के माध्यम से मनु की तपस्या के उपरांत राम राज्य की अवधारणा फलीभूत करने हेतु दशरथ तथा कौशल्या के यहाँ पुत्र के रूप में नीलवर्ण, चुंबकीय आकर्षण वाले, अत्यंत तेजोमय परम कांतिवान तथा अत्यंत सुंदर राम के जन्म की कथा और चारों भाइयों के नामकरण की महिमा का व्याख्यान किया, जिसे सुनकर भक्तगण मंत्र मुग्ध हो गए। वहीं ‘राम रघुवर की प्राणपिया भजो रे मन सिया सिया’ के सुमधुर गायन से प्रांगण भक्तिमय होकर झूम उठा। स्टील सिटी भिलाई छत्तीसगढ़ के सुविख्यात शिक्षाविद्, कर्मयोगी, अध्यात्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक विषयों के ज्ञाता, कथावाचक व कुशल वक्ता एमएम त्रिपाठी चेयरमेन कृष्णा ग्रुप ने कार्यक्रम में नीलमणि दीक्षित की अद्वितीय, अविस्मरणीय भूमिका की चर्चा करते हुए उन्होंने मंचस्थ पूज्यवर रामचरित मानस की पीयूष धारा को प्रवाहित कर जनमानस को धन्य करने वाला कहकर उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित आनंद त्रिपाठी, प्रमोद त्रिपाठी, कृष्णा त्रिपाठी, अर्चना मिश्रा, नरेश खोसला तथा सभी भक्तगण व श्रोतागणों का धन्यवाद ज्ञापित किया और अपने उद्बोधन में राम व भरत की रूप समानता व आपसी प्रेम की चर्चा की। उन्होंने अपने शब्दों में यह भी बताया कि संसार में जड़ हो या चेतन दोनों की ही गति ईश्वर के चरणों में ही होती है। उन्होंने कैकेयी के रूप सौंदर्य, कुशल सारथी व गुणवत्ता की चर्चा करते हुए दशरथ के जीवन में उनके स्थान का वर्णन अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया। उनके सुमधुर शब्दों व व्याख्यान से भक्तगण भक्ति के सागर में सराबोर हो रहे थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिवानंद योग निकेतन संस्था के सभी कार्यकर्ता, कृष्णा आर्टस् एवं म्यूजिक कॉलेज की प्रध्यापिका ज्योति शर्मा, अध्यापिका धनेश्वरी साहू, ऊषा, ऋतु मेनन तथा समाज सेवक नरेश खोषला, मंच संचालक सुनीता त्रिपाठी तथा रमेश तिवारी का सहयोग सराहनीय रहा।