राम जैसे पुत्र की कामना है तो पहले खुद बनें माता कौशल्या और पिता दशरथ: आचार्य पं. संदीप तिवारी …..भागवत सप्ताह के चौथे दिन मनाया गया प्रभु श्रीराम व कृष्ण के जन्मोत्सव।
भिलाई नगर 13 जनवरी 2025:- मर्यादा पुरुषोत्म राम जैसे पुत्र की कामना सभी माता-पिता करते है। लेकिन अगर आपको राम जैसा पुत्र चाहिए तो उससे पहले आपको खुद माता कौशल्या व पिता को दशरथ बनना पड़ेगा। तब आप बच्चों से अपेक्षा राम जैसे पुत्र की रखिए। मतलब आपको भी त्याग करना पड़ेगा। बच्चों की परवरिश के दौरान माता-पिता को खुद भी संस्कारी बनना पड़ेगा। तभी बच्चे भी संस्कार सीखेंगे। प्रभु राम के संदर्भ में यह बातें सेक्टर 2 में चल रहे भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन आचार्य संदीप तिवारी ने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में अभिभावक खुद बच्चों के सामने अश्लील गाने देखते व नाचते है और बच्चों को भी सीखा रहे है। दिन भर मोबाईल, सोशल मीडिया में लगे रहते है और बच्चा रोया तो उसे भी मोबाईल पकड़ा कर अपने स्नेह व दायित्वों से इतिश्री कर लेते है तो बच्चा क्या सीखेगा यह खुद को समझना पड़ेगा।




माता-पिता भी करें त्याग, विभिन्न प्रसंगों पर सुनाई कथा
रविवार को कथावाचक आचार्य संदीप तिवारी ने कृष्ण जन्म की कथा के पूर्व भगवान राम के अवतार की लीला का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने आदर्श स्थापित किया है, वह आज भी प्रासंगिक है। राम जन्म, ताड़का वध, राम विवाह, वनवास, रावण वध सहित राम राज्याभिषेक पर सुन्दर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि द्वापर में जब कंस के अत्याचार बढ़े तो श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर मुक्ति दिलाई।





राम केवल नाम नही, राम एक संस्कार है
आचार्य ने बताया कि भक्ति, उपासना व क्रिया यह तीन चीजे जहां होगी वहीं प्रभु का अवतार होता है। जैसे राजा दशरथ वेद है और वेद की तीन धाराएं भक्ति का रुप माता कौशल्या, उपासना सुमित्रा व क्रिया का रुप कैकयी को कहा गया है। राम चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि राम केवल एक नाम नही है अपितु राम एक संस्कार है और संस्कार सत्य व सुंदर है। इसलिए देवाधि देव महादेव भी प्रभु राम की उपासना में लीन रहते है। राम नाम एक मंत्र है जितना सरल राम का नाम है उतना ही सरल मंत्र।





राम नाम के महामंत्र को लेकर जीवन सफल करों, पूरी होगी मनोकामना रामायण का पाठ करों। इस पंक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि जो राम नाम के महामंत्र का जाप करेगा और राम रुपी नौका का आश्रय लेगा उसे राम भवसागर से पार करा देंगे। इसलिए मृत्यु के बाद अंतिम यात्रा में राम नाम सत्य है कहा जाता है। सत्य राम है और सत्य ही कृष्ण है।






