“वर्दी के पीछे गद्दारी! CRPF जवान ने लीक की देश की सुरक्षा, छत्तीसगढ़ से ISI कनेक्शन” इस जिले में छिपा ISI का एजेंट? CRPF जवान से पाकिस्तान ,तक खुली जासूसी..
? वर्ष 2015 से 2017 के बीच रायपुर के बड़ेरा कैंप में पदस्थ रहा सीआरपीएफ जवान, गरियाबंद में लगातार तैनाती के बाद हुआ था पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) तबादला

? एनआईए जांच में सामने आई आर्थिक लेन-देन की कड़ी, निलंबित एएसआई से जुड़े कोरबा निवासी फरार संदिग्ध तक पहुंची धनराशि की परतें
? राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र आईबी व छत्तीसगढ़ पुलिस ने कोरबा में सक्रिय की निगरानी टीमें, संदिग्ध की हर गतिविधि पर रखी जा रही है पैनी नजर
कोरबा में पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा: CRPF जवान से कारोबारी तक NIA के निशाने पर
NIA के छापे के पूर्व ही ऊर्जा नगरी कोरबा से गायब हुआ अज्ञात व्यापारी
? CRPF जवान बना ISI का मोहरा, कोरबा से मिली मदद!
देश की सबसे खुफिया एजेंसी NIA ने एक ऐसा खुलासा किया है जिससे छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक की सुरक्षा एजेंसियां हिल गईं हैं। CRPF के निलंबित जवान मोती राम जाट ने पाकिस्तान की महिला जासूसों के साथ मिलकर भारत के खिलाफ जासूसी की – और इस पूरे षड्यंत्र में कोरबा का एक कारोबारी भी शामिल!
कोरबा, छत्तीसगढ़ :- 05 जून 2025
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पाकिस्तान समर्थित अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क से जुड़ी गंभीर और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा चलाए गए देशव्यापी गुप्त ऑपरेशन में कोरबा के एक संदिग्ध कारोबारी की भूमिका उजागर हुई है, जिसका संबंध पहले से गिरफ्तार CRPF के निलंबित सहायक उप निरीक्षक मोती राम जाट से जुड़ा पाया गया है।
इस पूरे मामले की तह तक जाने वाली विशेष खोजी रिपोर्ट सबसे पहले ‘The Hitavada’ के छत्तीसगढ़ संस्करण के वरिष्ठ पत्रकार एवं न्यूज़ एडिटर मुकेश एस. सिंह द्वारा प्रकाशित की गई। उन्होंने इस विषय में व्यापक दस्तावेज़ी साक्ष्य और खुफिया सूचनाओं के आधार पर जासूसी नेटवर्क के गंभीर खतरे को उजागर किया है।
NIA का बहु-राज्यीय गुप्त ऑपरेशन: कोरबा बना विशेष केंद्र
NIA ने 31 मई को आठ राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, असम और छत्तीसगढ़—में एक साथ समन्वित तलाशी अभियान चलाया। कोरबा जिले की एक संदिग्ध लोकेशन पर भी छापा मारा गया, जहां एक स्थानीय कारोबारी के पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क से जुड़े होने की संभावना के आधार पर कार्रवाई की गई।
इस पूरी कार्रवाई को “Need to Know Basis” पर अंजाम दिया गया। इसका अर्थ है कि स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियों और यहां तक कि जिला स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी छापे की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, ताकि अभियान की गोपनीयता बरकरार रहे।
CRPF जवान से संपर्क में आया कोरबा का संदिग्ध
गिरफ्तार मोती राम जाट की पृष्ठभूमि की जांच में सामने आया कि वह 2015 से 2017 के बीच रायपुर के बाराडेरा कैंप में तैनात था। उस दौरान वह गरियाबंद जिले के संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी पर भेजा जाता था। यहीं पर उसकी मुलाकात कोरबा के उस संदिग्ध कारोबारी से हुई जो इस जांच में अब फरार है।
मोती राम जाट की अगली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई, जहां वह एक पाकिस्तानी महिला इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) के संपर्क में आ गया। प्रारंभ में उसने मीडिया से जुड़ी जानकारी साझा करने के नाम पर संवाद स्थापित किया, जो धीरे-धीरे जासूसी गतिविधियों में बदल गया।
खुफिया सूत्रों की पुष्टि: संवेदनशील जानकारी पहुंची पाकिस्तान
विश्वसनीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, CRPF से संबंधित संवेदनशील ऑपरेशनल प्लान, तैनाती संबंधी डेटा, और आंतरिक गोपनीय सूचनाएं जाट के माध्यम से सीधे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजी गईं। यह नेटवर्क महिला और पुरुष पाकिस्तानी एजेंटों के संयुक्त संचालन से काम कर रहा था, जिसका संचालन सोशल मीडिया और साइबर माध्यमों से किया जा रहा था।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कोरबा में फरार कारोबारी की भूमिका सिर्फ सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं, बल्कि वह इस पूरे नेटवर्क की स्थानीय ग्राउंड सपोर्ट यूनिट के रूप में कार्यरत था।
डिजिटल निगरानी और आगे की रणनीति
NIA और IB के संयुक्त समन्वय से कोरबा में संदिग्ध के डिजिटल ट्रेल (मोबाइल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और इंटरनेट एक्टिविटी) पर नजर गहराई से रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस को तकनीकी रूप से इस जांच में सहयोग के लिए निर्देशित किया गया है, हालांकि इस पूरे ऑपरेशन की बागडोर पूरी तरह NIA के हाथों में ही है।
इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क केवल एक कारोबारी या जवान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में फैले कुछ और सहयोगी और स्लीपर एजेंट भी शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारी या पूछताछ की संभावना को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
पत्रकार मुकेश एस. सिंह की खोजी रिपोर्टिंग
यह मामला केवल सुरक्षा एजेंसियों की सजगता का नहीं, बल्कि खोजी पत्रकारिता की सफलता का भी उदाहरण है। ‘The Hitavada’ के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश एस. सिंह ने इस पूरे प्रकरण को सामने लाकर यह दिखा दिया कि पत्रकारिता आज भी लोकतंत्र की चौथी मज़बूत स्तंभ है। उन्होंने दस्तावेजों, सूत्रों और तकनीकी साक्ष्यों के सहारे इस नेटवर्क की परतें उजागर की हैं।
निष्कर्ष: सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत
कोरबा जैसी जगहों से यदि इस तरह के जासूसी नेटवर्क का संचालन हो रहा है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान समर्थित तंत्र भारत की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने के नए-नए तरीके अपना रहा है। यह भी एक चेतावनी है कि स्थानीय स्तर पर सामान्य नागरिक या कारोबारी चेहरों के पीछे भी ऐसे खतरनाक नेटवर्क छिपे हो सकते हैं।
? यह मामला केवल एक गिरफ्तारी या छापे का नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया प्रणाली और सामाजिक सजगता की एक बड़ी परीक्षा है। कोरबा में NIA की गुप्त जांच अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहां से यह पूरा प्रकरण देशभर में एक बड़ा खुलासा बन सकता है।





