ए आई इन मेटलर्जिकल इंडस्ट्रीज पर परिचर्चा संपन्न
भिलाई नगर 20 जून 2025:- द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के भिलाई स्थानीय केंद्र द्वारा इंस्टीट्यूशन ऑफ प्लांट इंजीनियर्स छत्तीसगढ़ चैप्टर के सहयोग से रविवार 15 जून , 2025 को इंजिनियर भवन, सिविक सेंटर भिलाई में ”ए आई इन मेटलर्जिकल इंडस्ट्रीज ” विषय पर एक तकनीकी व्याख्यान का आयोजन किया गया|

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रणय कुमार , मुख्य महाप्रबंधक, सेट, सेल, भिलाई, विशिष्ट अतिथि के रूप में डा सुभाष गांगुली , विभागाध्यक्ष एवं सह प्राध्यापक, धातुकर्म एवं सामग्री इंजीनियरिंग, एन आई टी रायपुर , तथा अतिथि वक्ता श्री एस पी राजकुमार, वरिष्ठ प्रबंधक (ए एंड डी) सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र उपस्थित थे | कार्यक्रम की अध्यक्षता द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई केंद्र के चेयरमैन श्री पुनीत चौबे ने की |



कार्यक्रम के प्रारम्भ में स्वागत भाषण में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा के मानसेवी सचिव श्री बसंत साहू ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस ( ए आई ) वर्तमान उद्योग जगत की जरुरत बन रहा है | श्री साहू ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य मेटलर्जिकल इंडस्ट्रीज में ए आई के उपयोग से होने वाले लाभ तथा परिचालन में सहूलियत से जुडी जानकारी और ज्ञान साझा करना है |



मुख्य अतिथि प्रणय कुमार , मुख्य महाप्रबंधक, सेट/ सेल, भिलाई, ने अपने उदबोधन में कहा कि विश्व के प्राचीन इतिहास में अबेकस का उपयोग गणितीय गणना हेतु किया जाता था और उसके बाद 18वीं शताब्दी में मोर्स कोड का अविर्भाव हुआ | उन्होंने कहा कि वर्तमान में टेक्नोलॉजी जिस गति से अद्यतन हो रही है और बदलाव आ रहा है वह पिछले कई पीढ़ियों में नहीं हो पायी थी| श्री प्रणय ने कहा कि कॉलेज के दिनों में हमारा ज्ञान पुस्तकों से मिलता था और हमारे प्रोफेसर देते थे जो आज इन्टरनेट और ए आई तथा चैट जी पी टी के माध्यम से सरलता से उपलब्ध है |
उन्होंने कहा कि सेल में भी जनरेटिव ए आई का उपयोग प्रारंभ हो गया है और लगभग 60 परियोजनाओं में इस्तेमाल हो रहा है | श्री प्रणय कुमार ने बताया कि अन्य स्टील उत्पादक कंपनी आर्सेलर मित्तल और टाटा भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं | उन्होंने कहा कि मेटलर्जिकल इंडस्ट्रीज में ए आई के उपयोग की व्यापक संभावनाएं हैं | श्री प्रणय कुमार ने छात्रों से कहा कि उन्हें पहले मूल विषयों की पढाई पर ध्यान देना आवश्यक है और ए आई तथा चैट जी पी टी का उपयोग उस मूल ज्ञान को परिमार्जित करने में करें |

विशिष्ट अतिथि डा सुभाष गांगुली , विभागाध्यक्ष एवं सह प्राध्यापक, धातुकर्म एवं सामग्री इंजीनियरिंग, एन आई टी रायपुर ने अपना प्रस्तुतीकरण “स्टील माइक्रो स्ट्रक्चर” विषय पर दिया | उन्होंने बताया कि प्रत्येक सामग्री का एक माइक्रो स्ट्रक्चर होता है जो कि उसके प्रसंस्करण की प्रक्रिया से मिलता है और वही उसके गुणों को नियंत्रित करता है | डा सुभाष गांगुली ने बताया कि स्टील माइक्रो स्ट्रक्चर के परिशोधन द्वारा सभी उत्पादों की लागत किफायती होगी तथा इससे नैसर्गिक संसाधनों की बचत भी होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी |
उन्होंने कहा कि स्टील माइक्रो स्ट्रक्चर के ज्ञान से लक्षित उत्पाद के घटक तत्वों की जानकारी प्राप्त होगी जो भविष्य के स्टील उत्पादों के निर्माण प्रक्रिया में मदद गार साबित होगा | डा गांगुली ने बताया कि चैट जी पी टी तथा ए आई के उपयोग द्वारा वास्तविक और आभासी प्रक्रिया के अंतर को समझा जा सकता है |
अतिथि वक्ता श्री एस पी राजकुमार, वरिष्ठ प्रबंधक (ए एंड डी) सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपना प्रस्तुतीकरण “जनरेटिव ए आई इन स्टील इंडस्ट्रीज” विषय पर दिया | उन्होंने बताया कि जनरेटिव ए आई बहुत सारे डेटाबेस को एक मनुष्य की तरह विश्लेषण कर के उत्तर देता है | श्री राजकुमार ने ए आई, डीप लर्निंग , मशीन लर्निंग , एन एल पी जैसे नवीन तकनीक से विश्व की भविष्य में दिशा क्या होगी पर जानकारी साझा की| उन्होंने बताया कि ए आई के भविष्य के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने 10000 करोड़ के राष्ट्रीय ए आई मिशन का प्रारंभ किया है | श्री राजकुमार ने प्रस्तुतीकरण में सेल की ए आई नीति के तहत उठाये गए जागरूकता एवं क्षमता निर्माण की गतिविधियों की जानकारी दी| उन्होंने सलाह दी कि अपने निजी तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज ओपन सोर्स ए आई में साझा ना करें | धन्यवाद ज्ञापन आई आई पी ई के सचिव श्री पी के नियोगी ने दिया तथा संचालन श्री आलोक सिंह ने किया|
इस अवसर पर द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई केंद्र के पूर्व चेयरमैन , शिखर तिवारी , इंस्टीट्यूशन ऑफ प्लांट इंजीनियर्स (आई आई पी ई) छत्तीसगढ़ चैप्टर के उपाध्यक्ष, बी पी यादव, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) भिलाई शाखा एवं इंस्टीट्यूशन ऑफ प्लांट इंजीनियर्स छत्तीसगढ़ चैप्टर के सदस्य, भिलाई इस्पात संयंत्र, सेट/सेल, भिलाई, निजी उद्योगों के अधिकारी , भिलाई दुर्ग के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र छात्रा उपस्थित थे।



