कोई बाहर से नहीं, अपनों में ही छिपा था धोखेबाज़: रायपुर ACCU की रेड से पहले सटोरिया छोटू भांडुलकर को मुखबिरी कर बचाया गया!

?खबर का स्रोत: वरिष्ठ खोजी पत्रकार मुकेश एस. सिंह का सनसनीखेज ट्वीट
?जांच के घेरे में अब खाकी वर्दी वाले कई अधिकारी

रायपुर, 27 जून 2025:- । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपराध और खाकी वर्दी के बीच के धुंधले होते फर्क पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। वरिष्ठ खोजी पत्रकार मुकेश एस. सिंह द्वारा ट्विटर (अब X) पर साझा की गई एक सनसनीखेज पोस्ट के मुताबिक, रायपुर रेंज के कुख्यात जुआ-सट्टा माफिया आशुतोष भांडुलकर उर्फ ‘छोटू’ को रायपुर पुलिस की विशेष यूनिट Anti-Crime and Cyber Unit (ACCU) द्वारा की जा रही बड़ी छापेमारी से पहले ही गुप्त सूचना देकर भगाया गया।
इस ट्वीट के बाद न केवल रायपुर पुलिस महकमे में, बल्कि पूरे राज्य के सुरक्षा ढांचे में अफरा-तफरी मच गई है।
ऑपरेशन की योजना बनी थी सटीक… पर गड़बड़ी थी भीतर
जानकारी के अनुसार, 24 और 25 जून की दरम्यानी रात को रायपुर SSP डॉ. लाल उमेद सिंह के आदेश पर ACCU की 30 सदस्यीय टीम को गोपनीय मिशन पर भेजा गया था। बाइकों पर सवार यह टीम रायपुर के गोबरा नवापारा इलाके में छोटू भांडुलकर के सक्रिय जुए के अड्डे पर दबिश देने पहुंची थी। योजना बेहद गोपनीय थी, और तीनों ओर के रास्तों को ब्लॉक कर रेड की गई थी। मगर जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, छोटू और उसके लोग पहले ही फरार हो चुके थे।
इससे यह आशंका प्रबल हुई कि रेड की सूचना किसी भीतर के व्यक्ति ने ही लीक की।
जांच अब खाकी वर्दी वालों पर केंद्रित
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश एस. सिंह के अनुसार, रायपुर पुलिस के उच्च स्तर पर अब यह पुष्टि की जा रही है कि “सभी नहीं, लेकिन रेड में शामिल कई अधिकारी — खासकर ACCU के — अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच के दायरे में हैं।”
उनके कॉल लॉग्स, लोकेशन डेटा, और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
छोटू कोई मामूली जुआरी नहीं
छोटू भांडुलकर रायपुर रेंज का एक कुख्यात और शातिर आपराधिक चेहरा है, जो मोबाइल सट्टेबाज़ी, उधारी वसूली, क्लब विवाद, और सुरक्षा के नाम पर 30 से 40 हथियारबंद गुर्गों को हफ्ते की तनख्वाह पर रखता है। ये लोग चारों दिशाओं में 10 किमी के दायरे में निगरानी रखते हैं और चाकू–पिस्तौल से लैस रहते हैं। छोटू का घर भी आंशिक रूप से सरकारी ज़मीन पर बना है और उसके पास Fortuner, Thar और Swift जैसे वाहन हैं।
❓ बड़ा सवाल — स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क क्या कर रहा था?
छापे की जगह गोपनीय नहीं थी। वह रायपुर ACCU के अधीन बीट क्षेत्र में आती है। वहां का स्टाफ और स्थानीय मुखबिर तंत्र क्या कर रहा था? अगर वे अनजान थे तो यह उनकी अक्षमता है, और अगर वे जानबूझकर अनदेखा कर रहे थे तो यह साठगांठ का संकेत है।
?♂️ कौन थे ऑपरेशन में शामिल
इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे:
• IPS अमन झा
• ASP (क्राइम) संदीप मित्तल
• एडिशनल विवेक SP शुक्ला नया रायपुर
• DSP (क्राइम) संजय सिंह
• ACCU इंस्पेक्टर परेश पांडेय
हालांकि, रेड विफल रही और ACCU को सिर्फ कुछ छोड़ी गई बाइकें और जख्मी पांच अफसर ही हाथ आए।
? जनता का गुस्सा, सिस्टम की खामोशी
ट्विटर पर मुकेश एस. सिंह के इस खुलासे के बाद #माफियाकामित्र, #खाकीमेंगद्दार और #छोटूकोकिसने_बचाया जैसे हैशटैग वायरल हो गए हैं।
अब तक न तो किसी पुलिस अधिकारी का निलंबन हुआ है और न ही विभागीय जांच की कोई सार्वजनिक सूचना सामने आई है।
यह केवल एक रेड की विफलता नहीं है — यह सिस्टम के भीतर बैठे किसी गुप्त सहयोगी द्वारा एक कुख्यात अपराधी को बचाने की कहानी है।
यह सनसनीखेज खुलासा छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ खोजी पत्रकार मुकेश एस. सिंह द्वारा किए गए एक ट्वीट से सामने आया, जिसने न केवल राजधानी की कानून व्यवस्था को सवालों के घेरे में लाया, बल्कि रायपुर पुलिस के भीतर के तंत्र पर भी गहरा संदेह खड़ा कर दिया है।



