छत्तीसगढ़ में 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले की जांच अब सीबीआई के हवाले, दिग्गजों पर गिर सकती है गाज…. कोल लेवी घोटाले की सीबीआई जांच पर लगी अंतिम मुहर, The Hitavada के एक्सक्लूसिव खुलासे से मचा सियासी भूचाल
हाइलाइटर्स –
? गृह विभाग ने जारी किया गोपनीय आदेश, डीएसपीई एक्ट के तहत सीबीआई को मिली व्यापक जांच की मंजूरी

? पुलिस मुख्यालय ने सभी रेंज आईजी और जिलों के एसपी को भेजा विशेष निर्देश
? छत्तीसगढ़ में जल्द हो सकते हैं बड़े अफसरों, नेताओं और कारोबारियों के खिलाफ छापे व गिरफ्तारियां
रायपुर 13 जुलाई 2025:- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हवाले कर दी गई है। राज्य सरकार ने इस घोटाले की सीबीआई जांच को लेकर गृह विभाग के जरिए गोपनीय आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश में सियासी हलकों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।
The Hitavada के सीनियर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट एवं समाचार संपादक मुकेश एस सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम का एक्सक्लूसिव खुलासा करते हुए ट्वीट (@truth_finder04) कर बताया है कि सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (DSPE) की धारा-6 के तहत CBI को जांच की विधिवत अनुमति दे दी है। इससे पूरे घोटाले की जांच का दायरा अब केंद्रीय एजेंसी के पास चला गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि चाहे कोई भी कितना बड़ा पदाधिकारी, रसूखदार नेता या कारोबारी क्यों न हो, अब कार्रवाई से बच नहीं सकेगा।
570 करोड़ की वसूली का संगठित तंत्र
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के नाम पर अवैध वसूली का संगठित खेल चला। हर टन कोयले पर 25 रुपये की दर से वसूली की गई, जिससे करीब 570 करोड़ रुपये की अवैध राशि उगाही की गई।
इस पूरे घोटाले में रायपुर के कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को मास्टरमाइंड बताया गया है। ईडी के अनुसार, तिवारी ने अफसरों, ट्रांसपोर्टरों और बिचौलियों के साथ मिलकर यह पूरा तंत्र खड़ा किया। तिवारी इस समय न्यायिक हिरासत में है और उसकी जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज हो चुकी हैं।
गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के गोपनीय आदेश
The Hitavada के पास मौजूद विशेष दस्तावेजों के अनुसार, गृह विभाग की फाइल (क्रमांक F No. 4-10/Home-C/) के साथ-साथ पुलिस मुख्यालय के सीआईडी लीगल सेक्शन ने भी सभी रेंज आईजी और जिलों के एसपी को निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि CBI को पूरे मामले में जांच के लिए सभी दस्तावेज और साक्ष्य तत्काल सौंपे जाएं।
एक शीर्षस्थ अधिकारी ने इस संवाददाता को बताया कि सरकार ने सीबीआई जांच की अनुमति पर अंतिम हस्ताक्षर कर दिए हैं। लेकिन उन्होंने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी और आग्रह किया कि उनका नाम सार्वजनिक न किया जाए।
August 14, 2023 से शुरू हुआ था कानूनी संघर्ष
इस घोटाले की जांच को लेकर पहले ही कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। August 14, 2023 को ईडी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि पीएमएलए की धारा 66 के तहत ईडी ने राज्य सरकार को घोटाले के दस्तावेज सौंपे थे, लेकिन राज्य स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ईडी ने याचिका में यह भी कहा था कि राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और भ्रष्टाचार निवारण शाखा (ACB/EOW) में अधिकांश अधिकारी राज्य पुलिस सेवा के हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से सरकार के अधीन काम करते हैं। इससे निष्पक्ष जांच पर सवाल उठते हैं।
तीन बड़े अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत
मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने घोटाले में गिरफ्तार तीन वरिष्ठ अफसरों—आईएएस समीर विश्नोई, रानू साहू और तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया—को सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि ये अफसर राज्य में नहीं रहेंगे और अपनी उपस्थिति अन्य राज्यों के पुलिस थानों में दर्ज कराएंगे।
सियासी रसूखदारों की भी संलिप्तता
अगस्त 2023 में ईडी ने दूसरी अनुपूरक चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कांग्रेस के दो विधायकों देवेंद्र यादव और चंद्रदेव राय के नाम सामने आए। आरोप है कि कोयला और लोहा परिवहन से वसूली गई राशि बेनामी खातों और शेल कंपनियों के जरिए राजनीतिक खर्चों में लगाई गई।
ACB/EOW की चार्जशीट और जेल विवाद
जुलाई 2025 में ACB/EOW ने 29 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें खान और आबकारी विभाग के अफसरों की भूमिका का भी जिक्र है।
सितंबर 2024 में सूर्यकांत तिवारी ने आरोप लगाया था कि ACB/EOW के वर्तमान प्रमुख अमरेश मिश्रा ने रायपुर सेंट्रल जेल में उनसे जबरन बयान लेने की कोशिश की। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए जेल के सुपरिटेंडेंट कक्ष और प्रवेश द्वार की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया था।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस प्रकरण को राजनीतिक साजिश करार दिया और कहा था कि यदि ऐसी जबरदस्ती नहीं रुकी तो वे इसे सुप्रीम कोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाएंगे।
रामगोपाल अग्रवाल अब भी फरार
कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ ईडी ने 2023 में लुकआउट नोटिस जारी किया था। 2022-23 में हुई छापेमारी के बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
अब कार्रवाई की उलटी गिनती शुरू
The Hitavada के सीनियर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट मुकेश एस सिंह की एक्सक्लूसिव खबर के मुताबिक, CBI जांच की अनुमति मिलते ही छत्तीसगढ़ में नए सिरे से छापेमारी और गिरफ्तारी की तैयारी शुरू हो चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में बड़े अफसरों, रसूखदार नेताओं और कारोबारियों पर शिकंजा कस सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है।



