18 साल बाद पता चला वकील साहब फर्जी हैं, 1999 से कर रहे थे कोर्ट में प्रैक्टिस, जज साहब के लपेटे में आ गए
भोपाल 25 जुलाई 2025:- जिला कोर्ट ने एक फर्जी वकील रविन्द्र कुमार गुप्ता को तीन साल की सजा सुनाई है। उस पर आरोप है कि उसने 18 साल तक काला कोट पहनकर वकालत की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों को धोखा दिया। न्यायालय ने उसे चार हजार रुपए का अर्थदण्ड भी लगाया है।

एमपी नगर थाने में दर्ज हुआ था केस- राजधानी के पच्चीसवें अपर सत्र न्यायाधीश पहलाज सिंह कैमेथिया के न्यायालय ने यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष की पैरवी लोक अभियोजक सतीश समैया ने की। यह मामला तब सामने आया जब अधिवक्ता राजेश व्यास ने थाना एमपी नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई।

फर्जी प्रमाण पत्र हासिल किए- रिपोर्ट में कहा गया कि रविन्द्र कुमार गुप्ता ने फर्जी म.प्र. राज्य
अधिवक्ता परिषद का सनद प्रमाण पत्र तैयार किया। आरोप है कि उसने इस प्रमाण पत्र में कूटरचना कर जिला अभिभाषक संघ, भोपाल में सदस्यता प्राप्त की। उसने 14 अगस्त 2013 को सदस्यता प्राप्त की और उसका सदस्यता क्रमांक 4008 था। विगत दिनांक 10 मई 2016 को बार काउंसल आफ एमपी का फर्जी प्रमाण पत्र भी तैयार किया गया। यह प्रमाण पत्र क्रमांक 1629/1999 दिनांक 17 अगस्त 1999 बताया गया।
वास्तिवक एडवोकेट उज्जैन में रजिस्टर- जांच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र वास्तविक रूप से प्रदीप कुमार शर्मा, अधिवक्ता उज्जैन के नाम से एडवोकेट सूची में पंजीकृत है। इसके बाद नोटिस जारी कर आरोपित से असल दस्तावेजों की मांग की गई। आरोपित ने 3 अप्रैल 2017 को जो प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, वह भी फर्जी था। जांच के बाद यह सिद्ध हो गया कि आरोपित अधिवक्ता नहीं था। आरोपित विगत वर्ष 1999 से काला कोट पहनकर न्यायालय, पुलिस, पक्षकारों को धोखा दे रहा था।


