सत्संग से जीवन बनता है सुख-दुःख से परे: कुंज बिहारी सिंह......भिलाई में अखिल भारतीय रामाश्रम आंतरिक सत्संग का आयोजन.... - Steel City Online News Portal

सत्संग से जीवन बनता है सुख-दुःख से परे: कुंज बिहारी सिंह……भिलाई में अखिल भारतीय रामाश्रम आंतरिक सत्संग का आयोजन….

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सत्संग से जीवन बनता है सुख-दुःख से परे: कुंज बिहारी सिंह
भिलाई में अखिल भारतीय रामाश्रम आंतरिक सत्संग का आयोजन

भिलाई, 28 सितंबर 2025:-  अग्रसेन भवन, सेक्टर-6 में 26 से 28 सितंबर तक चल रहे अखिल भारतीय रामाश्रम आंतरिक सत्संग में देशभर से आए सैकड़ों साधक आध्यात्मिक साधना का लाभ ले रहे हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में रामाश्रम मथुरा से जुड़े आचार्यगण आंतरिक साधना, ध्यान और सत्संग का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

कार्यक्रम के संयोजक श्री कुंज बिहारी सिंह ने कहा

“मनुष्य जीवन का लक्ष्य केवल सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि सुख-दुःख से ऊपर उठकर शांति और आनंद का अनुभव करना है। रामाश्रम सत्संग इसी दिशा में साधक का मार्गदर्शन करता है।”

सुख-दुःख के झूले से मुक्ति

आचार्यगण ने अपने प्रवचनों में समझाया कि जीवन में सुख और दुःख दोनों साथ-साथ चलते हैं। दिन-रात की भांति यह चक्र अनंत है। जब तक मनुष्य इस चक्र से ऊपर नहीं उठता, तब तक सच्चा आनंद नहीं मिल सकता। सत्संग साधक को यही शिक्षा देता है कि वह सांसारिक उलझनों के बीच भी आंतरिक शांति प्राप्त करे।

मन, चित्त और विवेक की साधना

सत्संग में बताया गया कि मनुष्य का मन संसार की गतिविधियों में उलझा रहता है। चित्त से उठे विचार मन को बहा ले जाते हैं और बुद्धि-अहंकार का मेल जीवन को असंतुलित कर देता है।
आचार्यों ने स्पष्ट किया—

“जीवन में तीन प्रकार के प्रकाश आवश्यक हैं—ज्ञान का प्रकाश, बुद्धि का प्रकाश और प्रेम का प्रकाश। जब यह तीनों दीप जल उठते हैं तो अंधकार मिट जाता है और मनुष्य का जीवन प्रकाशमय हो जाता है।”

प्रेम ही साधना का बीज

रामाश्रम आंतरिक सत्संग की मूल साधना प्रेम है। साधक के हृदय में प्रेम का बीज बोकर उसे समर्पण और करुणा की ओर अग्रसर किया जाता है। आंसुओं से सींचा गया यह बीज साधक को ईश्वरानुभूति तक पहुँचा देता है।

भिलाई के सत्संग समारोह में श्रद्धालु गण
“बिन सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई”— इस सिद्धांत को केंद्र में रखकर आचार्यगण साधकों को सरल साधना के मार्ग दिखा रहे हैं।

देशभर से आए आचार्य और साधक

भिलाई के इस आयोजन में कई वरिष्ठ आचार्य और साधक शामिल हुए हैं। प्रमुख संयोजकों में श्री कुंज बिहारी सिंह,  रुद्र प्रताप मिश्रा,  शिवनाथ शर्मा (टूंडला),  प्रदीप शर्मा (ग्वालियर),  डी.के. गौर (अलीगढ़),  राजेंद्र गुप्ता (अहमदाबाद),  के.के. श्रीवास्तव (रांची),  धीरज कुमार (सागर),  राजेश सिंह (झारसुगुड़ा),  देवा साहू (राजनांदगांव),  गजेन्द्र ठाकरे (छुई खदान) और  विभूति सिंन्हा (अंबिकापुर) विशेष रूप से उपस्थित हैं।

सैकड़ों साधक इस आध्यात्मिक महोत्सव में भाग लेकर सत्संग और ध्यान साधना का अनुभव कर रहे हैं।

इस तीन दिवसीय आंतरिक सत्संग का सार यही है कि जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मा की ऊँचाई तक पहुंचना ही इसका सच्चा उद्देश्य है। संयोजक श्री कुंज बिहारी सिंह ने कहा—अखिल भारतीय रामाश्रय आंतरिक सत्संग का भिलाई का एकदृश्य “यदि जीवन में ज्ञान, विवेक और प्रेम का प्रकाश मिल जाए तो दुःख जीवन में टिक ही नहीं सकता। रामाश्रम सत्संग साधक को इसी प्रकाश की ओर ले जाता है।”

संयोजक कुंज बिहारी सिंह ,


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