ईओडब्ल्यू-एसीबी के डायरेक्टर अमरेश मिश्रा सहित तीन अधिकारियों पर आपराधिक परिवाद दर्ज, न्यायालय ने मांगा स्पष्टीकरण, फर्जी दस्तावेज तैयार कर उच्चतम न्यायालय में पेश करने का मामला, 25 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई।

रायपुर, 11 अक्टूबर2025:- प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन ने ईओडब्ल्यू-एसीबी पर झूठे साक्ष्य बनाकर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है, और परिवाद दायर किया है। इस पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने EOW/ACB डायरेक्टर अमरीश मिश्रा सहित तीन अफसरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कांग्रेस नेता ने अपनी शिकायत में कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करने की बजाय कहीं और से बयान बनाकर अदालत में ला रही है। उन्होंने कोल स्कैम केस का जिक्र किया, और कहा कि आरोपी सूर्यकांत तिवारी के खिलाफ जांच एजेंसी ईओडब्लू-एसीबी ने झूठे साक्ष्य बनाकर अदालत के साथ आपराधिक धोखाधड़ी किया।
यह कहा गया कि नियमानुसार जांच एजेंसी को अभियुक्त का बयान मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाना होता है। अभियुक्त सूर्यकांत तिवारी की जमानत के मामले में ईओडब्लू-एसीबी की ओर से एक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया था।
ए.सी.बी.ई.ओ.डब्लु के द्वारा अपराध क्रमांक-02/2024 एवं 03/2024 की प्रथम जिला जेल धमतरी में किसी अन्य प्रकरण में निरूद्ध रहा है, उसका 16/07/2025 सूचना प्रतिवेदन दर्ज कर विवेचना किया जा रहा है एवं विवेचना के दौरान निखिल चंद्राकर जो कराने के आशय से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायपुर पीबसीन अधिकारी कामिनी एवं 17/07/2025 को धारा-164 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दस्तावेज तैयार वर्मा के न्यायालय में पेश कराया गया था और उक्त अपराध के विवेचको द्वारा तैयार किये गये दस्तावेज की प्रतियाक्षउच्चतम न्यायालय के समक्ष सूर्यकांत तिवारी के अंतरिम जिसकी प्रति अवलोकन जमानत को निरस्त कराने के लिए प्रस्तुत किये गये
आवेदन के साथ पेश की गयी थी. करने पर यह स्पष्ट हो गया कि उक्त अपराध के विवेचको द्वारा निखिल चंद्राकर का कचन धारा-164 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कराया ही नहीं गया है बल्कि स्वयं विवेचको द्वारा अपने कार्यालय के कम्पयुटर में धारा-164 द.प्र.सं. के संबंध में दस्तावेज तैयार कर एक पेनड्राईव में लाकर उक्त न्यायालय में दिया, जिसके बाद न्यायालय को प्रभाव में लेकर उस दस्तावेज का प्रिंटआऊट न्यायालय के कम्प्युटर से लेकर उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किये है। उक्त दस्तावेजो में निखिल चंद्राकर का केवल हस्ताक्षर लिया गया है और न्यायालय के द्वारा उसका कोई कवन लेखबद्ध बही किया गया है। न्यायालय से दिनांक 16-17 जुलाई 2025 को सूचबद्ध अन्य प्रकरणो के आदेश पत्रिका की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की गयी और उक्त विवेचको द्वारा तैयार किये गये धारा-164 द.प्र.सं. से संबंधित दस्तावेजो का फोरेंसिक परीक्षण विशेषज्ञ से कराया गया है, तब विशेषज्ञ ने स्पष्ट अभिमत दिया है कि विवेचको द्वारा तैयार किया गया दस्तावेज का फौंट न्यायालय के प्रमाणित प्रतिलिपि में उपलब्ध फौंट से भिन्न है, यहां तक की विवेचको द्वारा तैयार किया गया धारा-164 द.प्र.सं. के दस्तावेज में मिश्रित फाँट का भी उपयोग हुआ है। विवेचको के द्वारा फर्जी तरीके से कूटरचना करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के दौरान झूठा दस्तावेज अपने विवेचना में गंभीरता उत्पन्न करने एवं अन्य निर्देशो को मामले में में झूव फंसाने के लिए दस्तावेज स्वयं तैयार किये है
और उस दस्तावेज को असली होना बताकर माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिये हैं जो एक अपराधिक कृत्य है। विवेचको के द्वारा बनावटी और झूठा दस्तावेज साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाने के इरादे से तैयार कर षड़यंत्रपूर्वक मिय्या साक्ष्य गढ़ा गया है। अधिवक्ता गिरिश चंद्र देवांगन के द्वारा उपरोक्त संबंध में माननीय उच्च न्यायालय छ.ग. बिलासपुर के सर्तकता विभाग को लिखित में दस्तावेजो सहित शिकायत की गयी है तथा आज दिनांक को ई.ओ.डब्लू.ए.सी.बी. के निदेशक अमरेश मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रेश ठाकुर एवं उपपुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा के विरुद्ध दांडिक परिवाद न्यायिक दण्डाधिकारी, प्रथम श्रेणी, पीठासीन अधिकारी आकांक्षा बेक, रायपुर छ.ग. के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए तीनो प्रस्तावित उपरोक्त अभियुक्तगण को नोटिस प्रेषित कर स्पष्टीकरण मांगा है और प्रकरण में उपरोक्त तीनो प्रस्तावित अभियुक्तगण को 25 अक्टूबर 2025 को उपस्थित होकर स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया गया है।


