आईजी रतनलाल डांगी यौन उत्पीड़न आरोपों के बाद पुलिस अकादमी से हटाए गए

⭕️ आईपीएस अजय यादव (बैच 2004) को बनाया गया नया पुलिस अकादमी प्रमुख

⭕️ एसआई की पत्नी की शिकायत के 14 दिन बाद कार्रवाई
रायपुर, 6 नवम्बर2025:- आईजी रतनलाल डांगी पर यौन उत्पीड़न आरोपों के बाद सरकार की बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस अकादमी चंदखुरी में पोस्टेड IG रतनलाल डांगी को यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच पद से हटा दिया गया है। डांगी को पुलिस अकादमी से हटाकर पुलिस मुख्यालय में अटैच किया गया है। डांगी पर SI की पत्नी ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस अकादमी, चंदखुरी के निदेशक पद से 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी आईजी रतनलाल डांगी को हटा दिया है। यह कार्रवाई एक योग प्रशिक्षिका द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद की गई है। शिकायतकर्ता महिला एक उप निरीक्षक (एसआई) की पत्नी हैं। वहीं, 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अजय कुमार यादव को नया प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है।

राज्य सरकार की यह बड़ी कार्रवाई राज्य स्थापना दिवस के भव्य आयोजन—‘रजत महोत्सव’—के समापन के एक दिन बाद सामने आई है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन दिवस पर और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन समापन कार्यक्रम में उपस्थित रहे थे।
गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता द्वारा बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, महिला ने पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आईजी डांगी पर यौन एवं मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। शिकायत को विभागीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया और प्रारंभिक जांच के बाद गृह विभाग ने यह निर्णय लिया।

सूत्रों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के 14 दिन बाद तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट में आईजी डांगी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने की अनुशंसा की गई थी। आगे की जांच जारी रहेगी और आरोप सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

डांगी ने पहले अपने बचाव में दावा किया था कि उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है और उन्होंने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पूर्व में ही सूचित कर दिया था। आरोपों और पलट दावों के बीच हुई गोपनीय तथ्य–संग्रह प्रक्रिया के बाद यह प्रशासनिक निर्णय लिया गया।
नए आदेश के अनुसार, आईपीएस अजय कुमार यादव, जो फिलहाल महानिरीक्षक नारकोटिक्स के पद पर पदस्थ थे , अब पुलिस अकादमी, चंदखुरी के निदेशक होंगे। सरकार का यह त्वरित निर्णय विभागीय अनुशासन और शून्य सहिष्णुता नीति का प्रतिबिंब माना जा रहा है।





