शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की 61.20 करोड की संपत्ति अटैच.. ईडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया संपत्तियों का ब्योरा…

रायपुर 14 नवंबर 2025:- . ईडी ने शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति अस्थायी तौर पर अटैच कर दिया है।

यह जानकारी ईडी ने अपने ऑफिसियल एक्स पर साझा करते हुए बताया है किं अवैध वसूली की रकम से अर्जित की गई संपत्तियों को अटैच किया गया है, इसमें 364. आवासीय भूखंड, कृषि भूमि, बैंक बैलेंस और 1.24 करोड़ रुपए की फिक्स शामिल हैं।
डिपाजिट (एफडी) उक्त सभी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अटैच किया गया है। यह घोटाला ईडी ने शराब घोटाले में एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। इस दौरान जांच में पता चला कि शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ। अनुसूचित अपराधों से अर्जित 2500 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई अर्जित की।
ईडी ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल पर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने चैतन्य के हक वाली करीब 61.20 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई है। इनमें 364 भूखंड भी शामिल हैं। चैतन्य ढाई हजार करोड़ के शराब घोटाले में 16 जुलाई से गिरफ्तार है। कल ही उसकी न्यायिक रिमांड 26 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। इस घोटाले में अब तक अन्य आरोपियों की कुल 276.20 करोड़ की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
ईडी ने एक बयान में कहा कि चैतन्य की कुर्क की गई संपत्तियों में 59.96 करोड़ रुपये मूल्य की 364 आवासीय भूखंडों और कृषि भूमि बैंक बैलेंस और एफडी के रूप में 1.24 करोड़ शामिल हैं। ईडी के अनुसार छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत एसीबी-ईओडब्ल्यू, रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने जाँच शुरू की। पुलिस जाँच से पता चला है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और अनुसूचित अपराधों से अर्जित 25 सौ करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय (पीओसी) लाभार्थियों को मिली।
पीएमएलए के तहत की गई जाँच से पता चला है कि भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे। मुख्यमंत्री के बेटे होने के नाते, उन्हें शराब सिंडिकेट का नियंत्रक और अंतिम लाभार्थी बनाया गया था। सिंडिकेट द्वारा एकत्रित सभी अवैध धन का हिसाब (हिसाब) रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी। इस धन के संग्रह, चैनलाइज़ेशन और वितरण (पीओसी) से संबंधित सभी बड़े फैसले उनके निर्देशों के तहत लिए जाते थे।
ईडी की जाँच में यह भी पता चला कि वह पीओसी का प्राप्तकर्ता था, जिसे उसने अपने रियल एस्टेट व्यवसाय में शामिल किया और बेदाग संपत्ति के रूप में पेश किया। चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से प्राप्त पीओसी का इस्तेमाल अपनी स्वामित्व वाली कंपनी मेसर्स बघेल डेवलपर्स के तहत अपनी रियल एस्टेट परियोजना विल ग्रीन के विकास के लिए किया। चैतन्य बघेल को ईडी ने 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।




