आपराधिक मामला एवं विभागीय जांच नहीं चल सकते एक साथ….

ए.एस.आई.की. विभागीय जांच पर स्थगन-स्टे

बिलासपुर 10 जनवरी 2026:- संतोषीनगर, रायपुर निवासी चंद्रभूषण वर्मा, रायपुर में पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) के पद पर पदस्थ है। उक्त पदस्थापना के दौरान चंद्रभूषण वर्मा के विरूद्ध कुछ शिकायते प्राप्त होने पर उनके विरुद्ध रायपुर में अपराध पंजीबद्ध कर न्यायालय में चार्जशीट पेश किया गया। उसके पश्चात् 26 सितम्बर 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, रायपुर द्वारा चंद्रभूषण वर्मा के विरुद्ध विभागीय आरोप पत्र जारी कर समान मामले में विभागीय जांच कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई।
उक्त विभागीय जांच कार्यवाही से क्षुब्ध होकर एएसआई चंद्रभूषण वर्मा द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर विभागीय जांच कार्यवाही को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कैप्टन एम. पॉल एन्थनी विरुद्ध भारत गोल्ड माइन्स लिमिटेड एवं अन्य, स्टेन्जेन टोयोटेस्यू इंडिया प्राईवेट लिमिटेड विरूद्ध गिरीश एवं अन्य, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य विरूद्ध नीलम नाग एवं अन्य के वाद में यह न्यायदृष्टांत प्रतिपादित किया गया है कि यदि किसी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक मामला विचाराधीन है ऐसी स्थिति में उक्त शासकीय अधिकारी / कर्मचारी के विरुद्ध विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समान आरोपों एवं समान अभियोजन साक्षियों को रखते हुये विभागीय जांच कार्यवाही नहीं की जा सकती है,।


यदि आपराधिक मामले के अभियोजन साक्षियों का कथन विभागीय जांच कर पहले ले लिया जाता है. इससे प्राकृतिक / नैसर्गिक न्याय का घोर उल्लंघन होता है एवं सम्पूर्ण विभागीय जांच कार्यवाही दूषित हो जाती है। उच्च न्यायालय, बिलासपुर जज पार्थ प्रीतम साहू द्वारा उक्त मामले की सुनवाई के पश्चात् अधिवक्तागण के तों से सहमत होते हुये कि आदेशित किया कि किसी भी शासकीय अधिकारी/कर्मधारी के विरुद्ध आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित रहने के दौरान समान अरापों पर विभागीय जांच कार्यवाही नहीं हो सकती है इस आधार पर याचिकाकर्ता ए.एस.आई. चंद्रभूषण वर्मा के विरूद्ध चल रही विभागीय जांच कार्यवाही पर स्थगन (स्टे) कर दिया गया।


