हाई कोर्ट ने होटल मालिक की गिरफ्तारी पर लगाया प्रश्नचिन्ह…. स्मृति नगर क्षेत्र के मामले में चौकी प्रभारी उप निरीक्षक पर एक लाख रुपए का लगाया जुर्माना… वेतन से जुर्माने के रकम की वसूली करने सरकार को कोर्ट ने दी छूट…

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हाई कोर्ट ने होटल मालिक की गिरफ्तारी पर लगाया प्रश्नचिन्ह
00 सुपेला क्षेत्र के मामले में पुलिस पर एक लाख रुपए का लगाया जुर्माना
00 वेतन से जुर्माने के रकम की वसूली करने सरकार को कोर्ट ने दी छूट

भिलाई नगर  23 जनवरी 2026:- स्मृति नगर पुलिस चौकी क्षेत्र  के एक होटल में देह व्यापार की कथित सूचना पर पुलिस की छापामार कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। कोर्ट ने होटल मालिक की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है। वहीं चौकी प्रभारी पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की रकम पुलिस वालों के वेतन से वसूली करने कोर्ट ने सरकार को छूट दी है।

स्मृति नगर क्षेत्र के एक होटल में पुलिस ने लगभग 4 महीने पहले जबरदस्ती घुसकर जांच की। पुलिस अधिकारी और जवान कथित तौर पर एक गुमशुदा लड़की की तलाश में पहुंचे थे। उन्होंने पहले मैनेजर से बदतमीजी की, फिर होटल के कमरे में घुसकर वहां मौजूद महिला-पुरुष को बाहर निकाला। मना करने पर पुलिस ने होटल मालिक से मारपीट की और बिना एफआईआर जेल भेज दिया।जिसके बाद पीड़ित ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। दायर याचिका में बताया गया कि होटल में रुके लोगों ने वैध दस्तावेज आधार कार्ड दिए थे, तो पुलिस कार्रवाई से पहले अनुमति लेनी थी। लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती कार्रवाई की।


हाई कोर्ट ने मालिक की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए चौकी प्रभारी पर एक लाख का जुर्माना ठोका है। साथ ही सरकार को छूट दी है कि जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के सैलरी से ये पैसे वसूल सकती है।


दरअसल, भिलाई के अवंतीबाई चौक निवासी आकाश कुमार साहू ( 30 वर्ष ) लॉ के स्टूडेंट है। इसके साथ ही वे परिवार के भरण-पोषण और आजीविका के लिए गदा चौक कोहका में होटल संचालित करते हैं। आकाश साहू ने अपने एडवोकेट के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने पुलिस की अवैध कार्रवाई व अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता विधिवत पंजीकृत और लाइसेंस लेकर होटल चला रहा है। जिसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमति ली है। यह होटल उसकी आय का एकमात्र जरिया है और यह उसकी आजीविका के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।


होटल संचालक ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी व जवान उनके होटल में पहुंचे। इस दौरान होटल में ठहरे लोगों से पूछताछ करने का बहाना बनाया गया। इस दौरान रजिस्टर और पहचान दस्तावेजों की जांच की।
जिसके बाद बगैर महिला पुलिस बल के एक कमरे में जबरदस्ती घूस गए, जहां पुरूष और महिला ठहरे थे। उन्हें कमरे से बाहर लाया गया। इस दौरान मैनेजर के साथ दुर्व्यवहार किया गया। साथ ही उन्हें बेवजह धमकी देकर चले गए। फिर कुछ समय बाद पुलिस अधिकारी व जवान फिर से होटल पहुंच गए।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वो होटल पहुंचा तो उसने पुलिस अधिकारी को संस्थान के मालिक होने की जानकारी दी।

इतना सुनते ही पुलिस अधिकारी भड़क गए और उसके साथ गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार कर अपमानित करने लगे। उसके विरोध करने पर उसे जबरिया हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट कर अभद्रता की गई। फिर बाद में बिना किसी वैध कारण के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

00 पुलिस ने कहा था, गुमशुदा लड़की की तलाश की गई थी

इस मामले में पुलिस अधिकारी का कहना था कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस एक गुमशुदा लड़की की तलाश में उनके होटल पहुंची थी। जिस पर कमरों की तलाशी ली गई। पुलिस ने दावा किया कि आकाश ने सरकारी काम में बाधा डाली। पुलिस वाहन की चाबी छीन ली और ड्राइवर के साथ हाथापाई की, जिससे शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया था । इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में ले लिया और बाद में जेल भेज दिया।

इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी संज्ञेय अपराध के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। महज संदेह और कहासुनी के आधार पर जेल भेजना असंवैधानिक है।


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