चेक अनादर के मामले में आरोपी को एक वर्ष का कारावास, 5 लाख प्रतिकर का दंड...... - Steel City Online News Portal

चेक अनादर के मामले में आरोपी को एक वर्ष का कारावास, 5 लाख प्रतिकर का दंड……

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चेक अनादर के मामले में आरोपी को एक वर्ष का कारावास, 5 लाख प्रतिकर का दंड……

दुर्ग 6 जनवरी 2026 :- चेक अनादर के मामले में आरोपी को एक वर्ष का कारावास एवं ₹5 लाख प्रतिकर भुगतान करने का न्यायालय ने आदेश किया  है,राशि भुगतान न किए जाने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा इस मामले का निर्णय श्रीमती अंजलि सिंह प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मजिस्ट्रेट के न्यायालय से आदेशित किया गया है प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता नीरज  गुप्ता ने पैरवी की है।

परिवादी समय स्टील प्लांट एंड ट्रेडिंग के संचालक संजीव गुप्ता निवासी चिखली तहसील और जिला दुर्ग ने अभियुक्त सीबा प्रसाद साहू, यूरेका फोबर्स लिमिटेड मुकुट नगर रायपुर नाका फाटक के पास दुर्ग, हेड ऑफिस 67 आनंद नगर तेलीबांधा रायपुर के विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत किया परिवादी और आरोपी का पूर्व से परिचित और मित्रता संबंध है इन्ही संबंधों के आधार पर आरोपी ने उससे बिल्डिंग मटेरियल हेतु सामानों की आवश्यकता होने पर  को लोहे की छड़ कीमती 4,00,000/-रुपये का उधार माल क्रय किया था उसी वक्त आरोपी ने अपने बैंक भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया धमधा रोड दुर्ग का चेक क्रमांक 193440 खाता क्रमांक 30897066841 कीमती 4,00,000/- रुपये का प्रदान करते हुये परिवादी से निवेदन किया गया था कि आरोपी के पास वर्तमान में नगद रकम की व्यवस्था नहीं है, जिसे  04/04/2017 तक रकम की व्यवस्था हो जायेगी इसलिए परिवादी आरोपी के द्वारा प्रदत्त उक्त चेक को अपने बैंक में 04/04/2017 को समाशोधन हेतु जमा कर उधार रकम प्राप्त कर लेवे । परिवादी ने उक्त चेक को समाशोन हेतु  04/04/2017 को अपने बैंक भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा एस एम ई अग्रसेन चौक दुर्ग बैंक कोड 002 यूजर आई डी 2872234 ब्रांच 491005 दुर्ग के समक्ष अपना खाता क्रमांक 32721565567 में जमा किया तब उसके बैंक ने उक्त चेक को अपने बैंक में प्रेषित किया परंतु आरोपी के बैंक ने  04/04/2017 को उक्त चेक कॉलम नंबर 6 “Drawer’s signature Differs” की टीप के साथ अनादरित कर दिया जिसकी जानकारी परिवादी ने अभियुक्त को दी तथा अभियुक्त ने चेक 03/05/2017 को परिवादी द्वारा बैंक में प्रस्तुत करने पर उक्त रकम प्राप्त हो जाने का आश्वासन दिया । पुनः अभियुक्त के कहने पर परिवादी ने उक्त चेक को  03/05/2017 को अपने बैंक में समाशोधन हेतु प्रस्तुत किया जो

03/05/2017 को “अपर्याप्त निधि” की टीप के साथ अनादरित हो गया । अभियुक्त को अनादरण होने की जानकारी देने पर अभियुक्त ने पुनः उक्त चेक को  27/06/2017 को समाशोन हेतु प्रस्तुत करने को कहा, जिस पर विश्वास करके परिवादी ने  27/06/2017 को उक्त चेक को बैंक में प्रस्तुत किया जो “अपर्याप्त निधि” की टीप के साथ अनादरित हो गया । परिवादी ने अभियुक्त को अपने अधिवक्ता का माध्यम से  05/07/2017 को रजिस्टर्ड नोटिस मय पावती कार्यालय पता और हेड ऑफिस रायपुर के पते पर प्रेषित करवाया गया। उक्त नोटिस  06/07/2017 प्रेषित हुई जिस संबंध में नेट के माध्यम से प्राप्त कर अपने अधिवक्ता को अभीस्वीकृति पत्र प्रदान किया गया है  अभियुक्त ने वर्णित रकम अदा नहीं की जिससे व्यथित होकर परिवादी ने यह परिवाद पेश किया है।

प्रश्नगत  चैक की कुल राशि ₹ 4,00,000/- (चार लाख रूपये) है। किन्तु वाद के लंबनकाल, प्रकरण की परिस्थितियों एवं परिवादी द्वारा परिवाद में किये गये व्यय को दृष्टिगत रखते हुये, अभियुक्त सीबा प्रसाद साहू को एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित किया जाता है। इसके अतिरिक्त दं.प्र.सं. की धारा 357 (3) के प्रावधान में प्रदत्त शक्तियों के अनुपालन में राशि ₹5,00,000/- (पांच लाख रूपये) प्रतिकर के रूप में परिवादी को प्रदाय करने हेतु आदेशित किया जाता। अगर प्रतिकर की राशि में चूक होती है तो अभियुक्त को पृथक से 3 माह का साधारण कारावास भुगताया जाए। परिवादी को प्रतिकर की राशि का भुगतान परिवाद की अपील अवधि पश्चात अपील न होने की दशा में किया जावे। अपील होने की दशा में  अपीलीय न्यायालय के आदेश के अनुरूप किया जावे। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता नीरज  गुप्ता ने पैरवी की थीं।


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