एडीजी जीपी सिंह बने डीजी, डीपीसी की बैठक में हुई अनुशंसा, जल्द जारी होगा आदेश
रायपुर 04 फरवरी 2025:- वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह को डीजी (डायरेक्टर जनरल) पद पर प्रमोट करने की अनुशंसा विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में की गई है। यह बैठक सोमवार को आयोजित की गई, जिसमें यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस संदर्भ में आधिकारिक आदेश बहुत जल्द जारी किया जाएगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश के बाद जीपी सिंह की सेवा बहाल की गई थी, जिसके बाद उनकी डीजी पद पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हुआ। अशोक जुनेजा के रिटायरमेंट के बाद डीजीपी स्तर का एक पद रिक्त हुआ था, जिसके लिए जीपी सिंह की पदोन्नति की गई।



1994 बैच के आईपीएस अफसर और छत्तीसगढ़ में बतौर एडीजी पदस्थ जीपी सिंह प्रमोट हो गए हैं। डीपीसी की बैठक में श्री सिंह को डीजी प्रमोट करने को मंजूरी दे दी गई है। इस संबंध में जल्द ही औपचारिक आदेश जारी होने की बात कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि, हाल ही में जीपी सिंह बहाल हुए हैं।
20 दिसंबर को दी थी ज्वाइनिंग
उल्लेखनीय है कि, वरिष्ठ IPS जीपी सिंह ने 20 दिसंबर को ज्वाइनिंग दे दी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाद राज्य के गृह मंत्रालय से भी उनकी बहाली का आदेश जारी होने के एक दिन बाद श्री सिंह ने ज्वाइनिंग कर लिया था। बता दें कि, 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अफसर गुरजिंदर पाल सिंह को छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान एक्सटॉर्शन, आय से अधिक संपत्ति और राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था। इन मामलों के बाद IPS जीपी सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा था। इस प्रस्ताव के बाद केंद्र ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी। इसके बाद जीपी सिंह ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और फिर से वापसी कर ली है।



सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की केंद्र की याचिका
श्री सिंह शुक्रवार 13 दिसंबर को राजधानी पहुंचे। केंद्र सरकार द्वारा बहाल किए जाने का आदेश जारी होने के बाद यहां उनके घर में उत्सव मनाया गया। श्री सिंह छत्तीसगढ़ हीं नहीं बल्कि देश के पहले आईपीएस हैं जो काफी संघर्ष और कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद वापस सेवा में लौटे हैं। उल्लेखनीय है कि, केंद्र सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो जाने के बाद श्री सिंह की बहाली का आदेश केंद्र ने जारी किया। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार 10 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह के खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को रद्द करने के खिलाफ भारत संघ की चुनौती को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भनी की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को व की चुनौती पर यह आदेश पारित किया, जिसमें सिंह की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को रद्द करने के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखा गया था।

आय से अधिक संपत्ति और राजद्रोह के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
उल्लेखनीय है कि, आय से अधिक संपत्ति और राजद्रोह के आरोप में उनकी गिरफ्तारी की गई थी। एक जुलाई वर्ष 2021 में एसीबी की टीम ने उनके पुलिस लाइन स्थित सरकारी बंगले के अलावा राजनांदगांव और ओडिशा सहित 15 अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसमें 10 करोड़ की अघोषित संपत्ति के साथ कई संवेदनशील दस्तावेज पाए गए थे। छापे से मिली संपत्ति के आधार पर एसीबी ने एक तरफ जीपी सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज किया था। वहीं दूसरी ओर सरकार 5 जुलाई को उन्हें सस्पेंड कर 8 जुलाई की रात को उनके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया था।
मई 2022 में मिली थी जमानत
इस घटनाक्रम के बाद 9 जुलाई 2021 को जीपी सिंह ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की और उसमें सीबीआई जांच की मांग की थी। मामले की जांच के बाद 11 जनवरी 2022 को जीपी सिंह को नोएडा से गिरफ्तार किया गया है। जिसके बाद उन्हें मई 2022 में उन्हें जमानत मिली थी। इस पूरे वाकये के बाद सर्विस रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर 21 जुलाई 2023 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईपीएस जीपी सिंह को भारत सरकार ने कंप्लसरी रिटायर कर दिया था। जब आईपीएस को कंप्लसरी रिटायर करने का फैसला लिया गया था। तब उनकी सर्विस के आठ साल बचे थे।

