अमिताभ जैन को मिल सकती है मुख्य सचिव की छह माह की फिर मोहलत, भाजपा हलकों में गहराया असंतोष…. राजनीतिक गलियारों में सवाल: असली सत्ता किसके हाथ — निर्वाचित नेता या जमे हुए नौकरशाह ?

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अमिताभ जैन को मिल सकती है मुख्य सचिव की छह माह की फिर मोहलत, भाजपा हलकों में गहराया असंतोष…. राजनीतिक गलियारों में सवाल: असली सत्ता किसके हाथ — निर्वाचित नेता या जमे हुए नौकरशाह?

छत्तीसगढ़ के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्य सचिव को विस्तार पर भाजपा के भीतर खलबली
सुब्रत साहू, रेनू पिल्लै, मनोज पिंगुआ जैसे वरिष्ठ आईएएस हाशिये पर, फिर भी निरंतरता का फैसला

भाजपा के मुखर सूत्रों का आरोप — कांग्रेस शासन में घोटालों की ढाल बने रहे जैन, ईडी-आईटी की आंच से भी बचे रहे

रायपुर, 26 मई 2025:- ( मुकेश एस. सिंह)  छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में इन दिनों हलचल तेज है। सूत्रों के अनुसार, राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्य सचिव अमिताभ जैन को आगामी छह महीनों का सेवा विस्तार मिलने की पूरी संभावना बन गई है। हालांकि आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है, मगर सरकारी और राजनीतिक हलकों में इसकी पुष्टि लगभग तय मानी जा रही है।

1989 बैच के आईएएस अधिकारी अमिताभ जैन को नवंबर 2020 में कांग्रेस सरकार (भूपेश बघेल के नेतृत्व में) के दौरान मुख्य सचिव बनाया गया था। वर्तमान में वह 31 जुलाई, 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लेकिन भाजपा की सत्ता में मजबूती के बावजूद शासन ने उनके सुपरएनुएशन के बाद भी उन्हें बनाए रखने की रणनीति अपनाई है — जिससे पार्टी के अंदरूनी हलकों में तीव्र असंतोष पनप रहा है।

विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि जैन के विस्तार के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियात्मक स्वीकृतियां पूरी हो चुकी हैं। गौरतलब है कि राज्य में सुभ्रत साहू, रेनू पिल्लै और मनोज पिंगुआ जैसे वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारी मौजूद हैं, फिर भी सरकार ने निरंतरता का विकल्प चुना है। राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि जैन केंद्र में सचिव स्तर की तैनाती के लिए एम्पैनेल हैं, पर उन्होंने राज्य में बने रहकर अपनी पकड़ और मजबूत की — यहां तक कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद उनका पद अडिग रहा।

हालांकि, पर्दे के पीछे यह निर्णय कईयों को खल रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता, जिन्हें पार्टी का मुखर व्हिसलब्लोअर माना जाता है, ने टिप्पणी की, “यह व्यक्तिगत नापसंदगी का मामला नहीं है — बल्कि यह सवाल है कि राज्य का प्रशासनिक संचालन कैसे किया गया। अमिताभ जैन को कांग्रेस शासन के दौरान राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में ईडी और इनकम टैक्स की जांचों को हल्का करने का प्रतीक माना गया। हमारी पार्टी के कई नेताओं ने बहु-करोड़ घोटालों पर उनकी प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल उठाए, लेकिन वे न केवल बचे रहे, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। यहां तक कि आलोचक भी उनकी प्रशासनिक स्थायित्व क्षमता की चुपचाप सराहना करते हैं, मगर इससे भाजपा में इस विस्तार को लेकर जो गहरा असहज माहौल है, वह कम नहीं होता।”

दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले ही जैन ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए आवेदन किया था, जो उनकी सेवानिवृत्ति की योजना का संकेत देता था। मगर अब विस्तार की राह खुलने के बाद, यह विकल्प अप्रासंगिक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आगामी अधिसूचना न केवल प्रशासनिक निरंतरता का प्रतीक होगी, बल्कि यह एक परीक्षा होगी — कि सत्तारूढ़ भाजपा अपनी आंतरिक असहमति, दीर्घकालिक प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सार्वजनिक जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कैसे संतुलित करती है — खासकर ऐसे समय में जब मजबूत नौकरशाही ताकतें राजनीतिक सत्ता के सामने चुनौती बनकर उभर रही हैं।


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