भिलाई नगर, 25 नवंबर2025:- भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के आवासों में “रिटेंशन स्कीम” के तहत निवासरत सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने किराये में की गई अत्यधिक बढ़ोतरी को लेकर गहरी नाराज़गी जताई है। सेवानिवृत्त कार्मिक कल्याण संघ ने सुरेश चंद के नेतृत्व में इस संबंध में दुर्ग कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों तक बीएसपी की सेवा करने के बाद अब भी संयंत्र से मिले आवासों में रह रहे हैं और वर्तमान में भी किराया एवं बिजली बिल नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। इसके अलावा उनसे 3 लाख से 9 लाख रुपये तक की प्रतिभूति (अमानत) राशि ली गई है, जिस पर उन्हें कोई ब्याज लाभ नहीं मिलता।

अचानक लगा पाँच गुना किराया बढ़ोतरी का झटका
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बीएसपी प्रबंधन ने 17 नवंबर 2025 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से किराये की दरों में अचानक पाँच गुना तक वृद्धि कर दी है—“24 रुपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से बढ़ा किराया हमसे नहीं पटाया जा सकेगा। यह जबरन घर खाली कराने की नीति है।”
— सेवानिवृत्त कर्मचारी
हाउस लीज स्कीम बंद कर कर्मचारियों को किया वंचित




सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने आगे बताया—
वर्ष 2002 के बाद हाउस लीज स्कीम पांच चरणों में लागू हुई
बिना सूचना के स्कीम बंद, हजारों कर्मचारी रह गए वंचित
जबकि सेल की अन्य इकाइयों में योजना जारी
भिलाई में लाइसेंस स्कीम भी मात्र दो चरणों के बाद रोक दी गई

खाली मकानों की हालत खराब, असामाजिक तत्वों का अड्डा बन रहे
कर्मचारियों ने कहा कि 50-55 वर्ष पुराने इन आवासों की प्रबंधन द्वारा कोई देखरेख नहीं की जा रही।
“खाली मकान अवैध कब्जाधारियों और असामाजिक तत्वों की शरणस्थली बनते जा रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या बढ़ रही है।”
जबकि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने सामर्थ्य के अनुसार मकानों का संरक्षण बनाए रखे हुए हैं और 32 गुना किराया भी अदा कर रहे हैं।

प्रशासन से क्या मांग?
किराया वृद्धि पर तुरंत रोक
लाइसेंस पद्धति पर आवास आवंटन पुनः शुरू किया जाए
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानजनक आवास सुरक्षा मिले
जमा अमानत राशि पर ब्याज या अन्य लाभ सुनिश्चित किए जाएं
सेवानिवृत्त कर्मचारी सुरेशचंद ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा—
“हमने जीवनभर बीएसपी की सेवा की है। अब बुज़ुर्गावस्था में यदि आशियाना छिन जाएगा तो हम कहाँ जाएंगे?”
निर्णायक कदम की प्रतीक्षा
संघ का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द समाधान नहीं करता तो वे आंदोलन के लिए विवश होंगे। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उचित निर्णय लेगा।




