भिलाई के स्पर्श हॉस्पिटल में केयरटेकर ने 85 वर्षीय बुजुर्ग को लगाया कैथेटर, मरीज बना ‘ट्रेनिंग’ का जरिया, ब्लेडर रैप्चर, परिजनों ने हेल्थ सेक्रेटरी, एसपी से की शिकायत……
सांस की तकलीफ का इलाज कराने आए मरीज को मिला नया घाव, हफ्ते भर होती रही ब्लीडिंग……

अस्पताल प्रबंधन पर साक्ष्य छिपाने, बंधक बनाने और गुमराह करने का भी आरोप
भिलाई नगर, 10 मार्च2026:- भिलाई के स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। कोहका निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग के साथ इलाज के नाम पर हुए प्रयोग ने न केवल उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया बल्कि अस्पताल के संवेदनहीन चेहरे को भी उजागर कर दिया है।
पीड़ित की पोती दिव्या शुक्ला ने स्वास्थ्य सचिव, कलेक्टर और एसपी से लिखित शिकायत कर अस्पताल प्रबंधन और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।




शिकायत के अनुसार बीएसपी रिटायर्ड चंद्रशेखर प्रसाद शुक्ला (85 वर्ष ) 23 फरवरी को सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल लाया गया था। वे पोती दिव्या के साथ स्कूटी से स्वयं चल कर पहुंचे लेकिन अस्पताल ने उन्हें जबरन आईसीयू में भर्ती करने का दबाव बनाया। परिजनों के विरोध पर उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहाँ ड्यूटी डॉक्टर ने बिना सहमति के कैथेटर लगाने का निर्णय लिया।


डॉक्टर ने खुद कैथेटर लगाने की बजाय एक अनुभवहीन अटेंडेंट को यह काम सौंपा। जब अटेंडेंट हिचकिचाया, तो डॉक्टर ने कहा कि “अगर अभी नहीं लगाएगा तो सीखेगा कब?”
ब्लेडर फटा, अस्पताल ने हफ्तों तक छिपाया सच
अटेंडेंट द्वारा की गई बलपूर्वक प्रक्रिया के कारण बुजुर्ग का यूरिनरी ब्लैडर फट गया और भारी रक्तस्राव होने लगा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इस गंभीर चोट को छिपाए रखा और डिस्चार्ज के बाद भी ब्लीडिंग होने पर इसे “सामान्य प्रक्रिया” बताकर गुमराह किया।
जब 6 दिन बाद स्थिति बेकाबू हुई तो विशेषज्ञों ने जांच में पाया कि ब्लैडर में गंभीर घाव और खून के थक्के जम चुके हैं, जिससे बुजुर्ग की जान को हार्ट अटैक या किडनी फेल होने का खतरा पैदा हो गया था।







बंधक बनाने और गुमराह करने का आरोप
दिव्या शुक्ला ने आरोप लगाया कि जब वे अपने दादाजी को दूसरे अस्पताल ले जाना चाहती थीं तो स्पर्श अस्पताल के प्रबंधन ने उन्हें घंटों तक “डॉक्टर आने वाले हैं” का झांसा देकर रोके रखा और दूसरे विशेषज्ञ के पास जाने से रोका। प्रबंधन और फ्लोर मैनेजर का व्यवहार इतना गैर-जिम्मेदाराना था कि उन्होंने सिस्टोस्कोपी में दिख रहे स्पष्ट साक्ष्यों के बावजूद अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया।
पीड़ित परिवार ने शिकायत के साथ सिस्टोस्कोपी की तस्वीरें, अस्पताल के बिल और अन्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट संलग्न की है, जो अस्पताल की लापरवाही को प्रमाणित करती है। परिवार का कहना है कि वे इस लड़ाई को कोर्ट तक ले जाएंगे ताकि भविष्य में किसी अन्य बुजुर्ग को सीखने का माध्यम न बनाया जाए।

दिव्या ने कहा कि मेरे दादाजी स्वस्थ अवस्था में अस्पताल गए थे लेकिन वहां के डॉक्टर ने उन्हें एक नौसिखिए के हाथों में सौंप दिया। यह इलाज नहीं, बल्कि अपराध है। हम दोषियों की गिरफ्तारी और अस्पताल का लाइसेंस रद्द होने तक चुप नहीं बैठेंगे।
वहीं सीएचएमओ डॉक्टर मनोज दानी ने बताया कि 9 मार्च को शिकायत मिली है, दस्तावेज अवलोकन किया गया है। शिकायत के संबंध में जांच की जाएगी, यह एक गंभीर मामला है।



पक्ष जानने के लिए स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर दीपक वर्मा से मोबाइल पर सम्पर्क असफल रहा।


गौरतलब हो कि स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर बेसमेंट में मेनीफोल्ड रूम और आक्सीजन प्लांट संचालित किए जाने की शिकायत पर पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद हास्पीटल ने वेबसाइट पर इंफ्रास्ट्रक्चर डिटेल में बेसमेंट पर संचालित आक्सीजन प्लांट और मेनीफोल्ड रूम को हटा कर यूटिलिटी और पार्किंग लिख दिया जबकि 100 बिस्तर इस अस्पताल की पार्किंग न होने की याचिका पर हाई कोर्ट ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी को 45 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। भिलाई निगम के दस्तावेजों में पार्किंग को लेकर कोई भी दस्तावेज उपलब्ध न होने की बात सामने आई है। ऐसे में वर्ष 2014 से संचालित इस अस्पताल को नर्सिंग होम एक्ट के तहत 100 बिस्तर की परमिशन कैसे मिली यह भी जांच के दायरे में है।


