महिला प्रशिक्षण अधिकारी के ट्रांसफर आदेश पर स्थगन (स्टे)
बिलासपुर 12 नवंबर 2025:- सेक्टर-4, भिलाईनगर, दुर्ग निवासी श्रीमती के. अरुन्धती महिला आई.टी. आई. कॉलेज, दुर्ग में प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर पदस्थ थी। उक्त पदस्थापना के दौरान सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग, नवा रायपुर द्वारा एक आदेश जारी कर के. अरुन्धती का स्थानांतरण जिला-दुर्ग से जिला-बीजापुर कर दिया गया।

उक्त स्थानांतरण आदेश से क्षुब्ध होकर के. अरुन्धती द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं वर्षा शर्मा द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता का पुत्र भव्य नायडु, डीएव्ही पब्लिक स्कूल, दुर्ग में कक्षा-4 में अध्ययनरत् है एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा डायरेक्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन, मद्रास एवं अन्य विरूद्ध ओ. करूप्पा थेवन अन्य के वाद में यह निर्णय दिया गया है कि किसी भी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के पुत्र / पुत्री यदि स्कूल में अध्ययनरत् है तो मिड सेशन के दौरान उक्त शासकीय अधिकारी/कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं किया जायेगा।



इसके साथ ही अधिवक्तागण द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता की माता श्रीमती के. भगवती की उम्र 77 वर्ष की है। वे मानसिक बीमारी से ग्रस्त होने के कारण उनका जिला-दुर्ग में ईलाज चल रहा है, याचिकाकर्ता पर उनकी बीमार माता एवं पुत्र की जिम्मेदारी है इसके बावजूद भी याचिकाकर्ता महिला का घोर अनुसूचित जिला-बीजापुर स्थानांतरण किया जाना पूर्णतः नियम विरूद्ध है। उक्त मामले में याचिकाकर्ता द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा एस. के. नौशाद रहमान एवं अन्य विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के वाद में पारित न्यायदृष्टांत का हवाला दिया गया।


उक्त मामले की सुनवाई हाईकोर्ट न्यायाधीश श्री पार्थ प्रतीम साहू के न्यायालय में हुई। उन्होंने अधिवक्तागण द्वारा दिए गये उपर्युक्त वर्णित आधारों पर याचिकाकर्ता श्रीमती के. अरुन्धती का जिला-दुर्ग से जिला-बीजापुर किये गये स्थानांतरण पर स्थगन (स्टे) करते हुये उत्तरवादीगण को यह निर्देशित किया गया कि वे याचिकाकर्ता को तत्काल पूर्व पदस्थापना स्थल महिला आई.टी.आई., दुर्ग में तत्काल पदस्थ करें ।


