BREAKING :- पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को बड़ा झटका…. नान घोटाला मामले में अग्रिम जमानत  याचिका खारिज…

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रायपुर 20 नवंबर 2024:- नान घोटाला मामले में ACB-EOW द्वारा दर्ज नई FIR मामले में पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को बड़ा झटका लगा है। रायपुर की ACB कोर्ट में उनके द्वारा लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। मामले की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश,विशेष न्यायाधीश ( वि.अधि.) निधि शर्मा तिवारी द्वारा की गई। पूर्व महाधिवक्ता ने यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी के माध्यम से लगाई थी।

थाना-ACB/EOW रायपुर के अपराध क्रमांक-49/2024 धारा 182, 211, 193, 195(A), 166(A), 120B भा.दं.सं. धारा – 7, 7 (क), 8, 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित) 2018 के तहत मामला दर्ज है

अभियोजक डॉ. सौरभ पांडेय द्वारा प्रस्तुत तर्क मे जमानत आवेदन को निरस्त किये जाने का निवेदन इन आधारों पर किया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय के पत्र दिनांक 02/04/2024 के माध्यम से अवगत कराया गया कि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 09/15 तथा इसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय में पंजीबद्ध ECIR/RPSZO/01/2019 के आरोपीगण  अनिल टुटेजा एवं  आलोक शुक्ला के विरूद्ध आयकर विभाग के द्वारा Income Tax Act की धारा 132 (1) के तहत् कुछ डिजिटल साक्ष्य एकत्रित किए गए थे तथा उन डिजिटल साक्ष्यों का आंकलन करने पर पाया गया कि  अनिल टुटेजा एवं  आलोक शुक्ला के द्वारा न केवल प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा पंजीबद्ध ECIR/RPZO/2019 की प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास कर रहे थे, वरन छत्तीसगढ़ सरकार के ब्यूरोकेट तथा संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारियों के साथ मिलकर अपराध क्रमांक 09/2015 के ट्रायल जो  विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अधि.), रायपुर में विचाराधीन था, को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। साथ ही साथ अपराध क्रमांक 09/2015 के गवाहन को अपने कथनों को बदलने का दबाव भी उनके द्वारा बनवाया गया तथा राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में पदस्थ उच्चाधिकारियों के साथ मिलकर अपराध क्रमांक 09/2015 से संबंधित दस्तावेज, व्हाट्सपएप चैट्स के माध्यम से प्राप्त करते हुए अपराध क्रमांक 09/2015 के अभियोजन साक्ष्य को प्रभावित किया गया। आरोपी सतीश चंद्र वर्मा जिनकी इस अपराध में महत्वपूर्ण भूमिका है। इनके सहयोग के बिना इस अपराध को अमली जामा पहनाया जाना संभव नहीं था, को जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है क्योंकि जमानत प्राप्त होने पर वह स्वतंत्र रूप से इस अपराध के साक्ष्य को मिटाने एवं नवीन अपराध किए जाने की ओर अग्रसर हो सकती है। आरोपी एक साधन संपन्न एवं आर्थिक रूप से सशक्त तथा प्रभावी व्यक्ति है। जमानत का लाभ दिये जाने से वह

साक्ष्य एवं साक्षियों को प्रभावित कर सकता है। इसके अतिरिक्त उसके विदेश पलायन की भी संभावना विद्यमान है। जहां इस प्रकरण की विवेचना प्रारंभ ही नहीं हुई है आरोपी को जमानत का लाभ दिये जाने से उसके द्वारा साक्ष्य एवं साक्षियों को प्रभावित करने की संभावना विद्यमान रहेगी। अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। अपराध में आरोपी सतीश चन्द्र वर्मा की भूमिका स्पष्ट रूप से परिलक्षित है। अतः उपरोक्त तथ्यों एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत के संबंध में पारित सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन निरस्त किये जाने हेतु प्रतिवेदन सादर प्रस्तुत है। अतः अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन निरस्त किये जाने का निवेदन किया गया है।

केस डायरी का अवलोकन किया गया। उक्त अपराध क्रमांक 49/2024 की केस डायरी में उपलब्ध सामग्री के अवलोकन से स्पष्ट है कि आवेदक/अभियुक्त के विरूद्ध महाधिवक्ता के पद पर पदस्थ रहते हुए अन्य अभियुक्तगण के साथ मिलकर आपराधिक षड़यंत्र करते हुए लोक कर्तव्य का पालन उचित रूप से न करने संबंधी आरोप है। आवेदक/अभियुक्त के विरूद्ध आरोपित अपराध की गंभीरता एवं केस डायरी में उपलब्ध तथ्यों, परिस्थितियों व सामग्री पर समग्र रूप से विचार करने से आवेदक/अभियुक्त को अग्रिम जमानत का लाभ दिये जाने हेतु यह उपयुक्त मामला होना दर्शित न होने से विचारोपरांत आवेदक के द्वारा प्रस्तुत उक्त अग्रिम जमानत आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 480 BNSS स्वीकार किये जाने योग्य न होने से एतद्वारा निरस्त किये जाते हैं।


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