छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को सही बताया है।

बिलासपुर 19 अक्टूबर 2025 :- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है। चैतन्य बघेल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी कि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई और उनकी गिरफ्तारी असंवैधानिक है। चैतन्य बघेल की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने शराब घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई कर रही है। 18 जुलाई को जन्मदिन के दिन चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हुई थी इस प्रकार वह 93 दिनों से रायपुर जेल में बंद है।

चैतन्य ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शराब घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई अपनी गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शराब घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी और एजेंसी की जांच के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जांच और गिरफ्तारी प्रक्रिया में अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है। यह फैसला छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा रहा है, जहां यह मामला भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जुड़ा है।
इस मामले में जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस ने 24 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा था। जिसे अब सुनाया गया है। मामले के सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि, जांच और गिरफ्तारी पर हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नहीं है। कोर्ट ने माना कि ईडी की कार्रवाई कानून के अनुसार की गई है। इस मामले में न्यायालय को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है।
ईडी की टीम ने शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्होंने जमानत के लिए कई बार याचिका लगाई लेकिन हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी कि ईडी की ओर से की गई जांच, गिरफ्तारी को नियम के खिलाफ और असंवैधानिक है। उन्होंने इसे रद्द करने की मांग की थी।
बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने 24 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और फैसला सुरक्षित रखा था। ईडी की ओर से एडवोकेट सौरभ पांडेय ने पैरवी की, जबकि चैतन्य ने कार्रवाई को असंवैधानिक बताया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि एजेंसी की जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई, इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं। चैतन्य ने दावा किया था कि ईडी का अधिकार क्षेत्र सीमित है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। यह फैसला 18 अक्टूबर 2025 को सुनाया गया, जो राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच को मजबूती देता है।
यह मामला छत्तीसगढ़ में 2019-2023 के दौरान हुए शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है। ईडी और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के अनुसार, चैतन्य बघेल सिंडिकेट के प्रमुख सदस्य थे और 1,000 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन को संभालते थे। 6 अक्टूबर को विशेष कोर्ट ने उन्हें 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर भेजा। बाद में रिमांड को 29 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया। चैतन्य ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की, लेकिन वहां से हाईकोर्ट जाने की सलाह मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य की याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि पहले हाईकोर्ट में जाएं। कोर्ट ने ईडी और सीबीआई की शक्तियों को चुनौती देने वाली दलीलों को प्रारंभिक स्तर पर अस्वीकार किया। यह फैसला राजनीतिक मामलों में न्यायिक संयम को दर्शाता है, जहां जांच एजेंसियों को स्वतंत्रता दी जाती है। भूपेश बघेल ने भी सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग की, लेकिन परिणाम चैतन्य के समान रहा।
यह फैसला कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि शराब घोटाला पूर्व सरकार की छवि को प्रभावित कर रहा है। विपक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, जबकि भाजपा ने भ्रष्टाचार उजागर होने का दावा किया। चैतन्य की गिरफ्तारी के बाद राज्य भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें आर्थिक नाकेबंदी भी शामिल थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला छत्तीसगढ़ की आगामी राजनीति को आकार देगा।



