भारतीय ज्ञान -विज्ञान परम्परा मूलक शिक्षा नीति जड़ों से जोड़ती है – आचार्य डॉ.महेश शर्मा…संस्कृत शिक्षा पर सफल संगोष्ठी, सौ से अधिक शिक्षक हुए शामिल

दुर्ग 23 जुलाई 2025:- छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान की दुर्ग जिला इकाई की ओर से खालसा पब्लिक स्कूल दुर्ग में संस्कृत शिक्षक- व्याख्याताओं की संगोष्ठी आयोजित की गई। पूरे आयोजन की खास बात यह रही कि अतिथियों के उद्बोधन और वार्तालाप अधिकांशत: संस्कृत में ही हुए। वहीं संस्कृत में अनुदित राज्य गीत भी उपस्थित लोगों ने गाया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि साहित्य-संस्कृति मर्मज्ञ एवं शिक्षाविद् आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा थे और अध्यक्षता दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी अरविन्द मिश्र ने की। छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान के प्रादेशिक सचिव एवं मुख्य वक्ता डॉ मनीष शर्मा ने प्रदेश में संस्कृत की स्थिति पर अपनी बात रखी। वहीं संस्थान के संयोजकों और संगठन सचिवों के नामों की घोषणा भी इस अवसर पर की गई।

आयोजन में मुख्य अतिथि डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वेद, रामायण, महाभारत, गीता, कालिदास, पंचतंत्र, हितोपदेश और स्वामी विवेकानन्द के बिना भारतीय ज्ञान -विज्ञान परंपरा की कल्पना भी असम्भव है। शिक्षा नीति 2020 की पृष्ठभूमि भी यही है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान -विज्ञान परंपरा मूलक शिक्षा नीति जड़ों से जोड़ती है। इन जड़ों से जुड़ाव होने के कारण शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से राष्ट्र की उन्नति सुनिश्चित है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी अरविन्द मिश्र ने संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वे इसके लिये हरसंभव सहयोग करेंगे। छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान के प्रादेशिक सचिव एवं मुख्य वक्ता डॉ मनीष शर्मा ने प्रदेश में संस्कृत की स्थिति ठीक नहीं होने पर चिंता व्यक्त की। डॉ.शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम् के अध्यक्ष आदि की नियुक्ति अभी तक नहीं की गई है। उधर छत्तीसगढ़ संस्कृत विश्वविद्यालय की मांग भी लम्बित है। डॉ.मनीष शर्मा ने शासन से उक्त मांगों को यथाशीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि व्यावसायिक शिक्षा के नाम से संस्कृत की उपेक्षा न की जाये। डॉ.मनीष शर्मा ने संस्कृत को और अधिक रोजगार परक बनाने के सुझाव भी दिये। कार्यक्रम में संस्कृत में हुए व्याख्यानों से विद्यार्थियों को संस्कृत माध्यम से परीक्षा देने की प्रेरणा मिली।

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के अधिकांश परीक्षार्थी संस्कृत विषय के प्रश्न पत्रों के उत्तर संस्कृत भाषा में नहीं लिख पाने के कारण फेल हो गये। सबसे यह भी अनुरोध किया गया कि आगामी 25 जुलाई से 9 अगस्त तक संस्कृत महोत्सव आयोजित है, कृपया सभी इससे जुड़ें और विशाल संस्कृत शोभा यात्रा में शामिल होकर उसे सफल बनाएं।

संयोजकों और संगठन सचिवों के नामों की घोषणा
आयोजन में छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षा सेवा संस्थान के दुर्ग जिला संयोजक आचार्य हेमन्त शर्मा ने प्रादेशिक सचिव की सहमति से जिले की सभी तहसीलों और विकास खण्डों के संयोजकों और संगठन सचिवों के नामों की घोषणा की। दुर्ग हेतु ईश्वरी देवांगन एवं अनुराधा अलवी, धमधा के लिये दुर्गेश नंदिनी सोनी एवं श्रीमती प्रेमलता धोटे , पाटन के लिये डॉ. सत्यभामा देशमुख एवं लीना प्रजापति आदि के मनोनयन हुवे। मुख्य अतिथि आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा और अध्यक्षता कर रहे अरविन्द मिश्र का आयोजकों द्वारा उत्तरीयम् , श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनन्दन किया गया। आचार्य डॉ.महेश शर्मा ने भी भारतीय ज्ञान – विज्ञान परम्परा पर लिखित अपनी “छत्तीसगढ़ में संस्कृत” आदि पुस्तकें आयोजकों , जिला शिक्षा अधिकारी और संस्कृत शिक्षकों को भेंट कीं। संचालन जिला संयोजक आचार्य हेमंत शर्मा ने और आभार ज्ञापन वरिष्ठ संस्कृत शिक्षिका ईश्वरी देवांगन ने किया।



