दुर्ग 20 अगस्त 2024:- भारतीय संविधान की पुस्तिका हाथ में लेकर प्रदर्शन दिल्ली संसद भवन से अब भिलाई तक चल रहा है। कांग्रेसी सांसद राहुल गांधी कई बार अपने हाथ में भारतीय संविधान की पुस्तिका दिखाते दिखे। और अब भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के भी हाथ में बलौदाबाजार हिंसा मामले में गिरफ्तारी के वक्त भारतीय संविधान की पुस्तिका थी। कांग्रेस पार्टी के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी पिछली सरकार में मोदी सरकार पर संविधान के हनन का आरोप अक्सर लगाते रहे है। इसके जरिए राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस लोगो को बताना चाहती है कि भाजपा के राज में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है,मोदी और भाजपा संविधान बदलना चाहते है ऐसा आरोप राहुल गांधी भी अपने विदेशी दौरों पर लगा चुके है।

सियासत की इस लड़ाई में विरोधी दल के नेताओ पर भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने और जेल भेजने पर ऐसा आरोप लगाया जाने लगा है। इसके बावजूद उस नेता के समग्र सेहत पर इसका खास असर नहीं पड़ता। क्योंकि जब जब विपक्ष के नेताओं पर ऐसे आरोप लगते है संविधान खतरे में की बात की जाती है जबकि कुछ ना कुछ तो ऐसा कुछ होता ही होगा जिस कारण से कार्यवाही की जाती है ।



क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोप भी तो इन्ही नेताओं और उनके साथ जुड़े बड़े बड़े अधिकारियों पर ही तो लगते है।आम जनता पर जब भी किसी मामले में कार्यवाही होती है तो किसी भी राजनीतिक दल के नेता को संविधान खतरे में नजर नहीं आता बल्कि नेता और अधिकारी कानून के हिसाब से ही कार्यवाही का दंभ भरते हैं जबकि आज देश भर के न्यायालयों में चल रहे मामलों पर बारीकी से और ईमानदारी से अध्ययन किया जाय तो अनेक बेगुनाह लोगों की भी जिंदगी पिसिज रही है

न्यायालयों की दौड़ भाग में साथ ही अनेक ऐसे भी होंगे जिनकी जीवन भर की जमा पूंजी भी न्यायलयीन मामलों में खत्म हो गई और उन्हे आर्थिक परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा होगा और इस लिए नेताओं पर जब भी किसी मामले में कार्यवाही होती है और वो संविधान खतरे में होने और राजनीतिक दुर्भावना से कार्यवाही की बाते करता है तो आम जनता में कोई खास संदेश नही जाता। चुनावी दल के लोगो के अलावा मीडिया के लोगों की बस नज़र इन घटनाओं पर रहती है और आम जन इसे पढ़ सुनकर एक कान से दूसरे कान से निकाल देते है ।


और चुनावों के समय वोट डालने के वक्त आम जनता ऐसी घटनाओं को तवज्जो नहीं देती। क्योंकि पूरे देश में राजनीतिक गिरफ्तारियां कोई नई बात नही है यह तो इंदिरा नेहरू के समय से ही विपक्ष की आवाज दबाने एक परिपाटी चली आ रही है जिसका सबसे बड़ा उदाहरण आप इमरजेंसी को पढ़ सुनकर समझ सकते है जो अब इस तरह की कार्यवाहियां आम बात हो गई है। इसीलिए भारत के लोकतंत्र का स्थान दुनिया के 179 लोकतांत्रिक देशों में 104 वें नंबर पर है जो डेमोक्रेसी (V-DEM) रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट से स्पष्ट है।

बहरहाल, बलौदा बाजार मामले को लेकर भिलाई की घटना पर नजर डालें तो विधायक देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के वक्त प्रदेश कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता मौके पर नही पहुंचा। जबकि पूर्व मुख्य मंत्री भूपेश बघेल, मंत्री ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे, गुरु रूद्रकुमार, जैसे दिग्गजों ने पांच साल बड़े बड़े विभागों के इसी जिले से मंत्री रहकर प्रदेश का नेतृत्व किया है किंतु इनमें से एक भी नेता देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के वक्त उनके घर के आस पास नजर नहीं आए क्या ये जिले से बाहर थे या जानबूझकर इस मामले से इन्होंने दूरी बनाए रखी थी यह समझने का विषय है। हां पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज और दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा जरूर नजर आए ।





किंतु दूसरे दिन इन्ही नेताओं ने रायपुर में प्रेस कान्फ्रेस कर अपने विधायक देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी का विरोध किया, और भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया क्या ऐसा इन्होंने दिल्ली के दबाव में किया यह जानना भी यहां जरूरी है ।

राजनीति में विरोध के नए नए पैंतरे चलते रहते हैं। संविधान निर्माता डॉ भीमराव बाबा साहेब अम्बेडकर को हम लोगो ने साक्षात तो नही देखा, पर जब भी उनकी तस्वीर देखी, उसमे वे संविधान की किताब बड़े सम्मान और गर्व से पकड़े दिखते हैं।
आज उसी संविधान की उसी पुस्तिका का प्रदर्शन आरोपी बनाए गए नेता करने लगे हैं क्या यही बाबा साहब और उनके संविधान का सम्मान है । हिंसा या भ्रष्ट्राचार के आरोप में गिरफ्तारी के वक्त नेता भारत की महान संविधान की दुहाई क्यों देते हैं, जनता यह समझ नही पाती है। संविधान की प्रति ये नेता तब दिखाते है, जब उसी संविधान के तहत उन पर कार्यवाही की जा रही होती है और उन्हे अचानक संविधान खतरे में नजर आने लगता है।

बाबा साहब ने कहा था, यदि यह संविधान भारत में कभी फेल हो जाता है तो वह संविधान की गलती नही, बल्कि उसे चलाने वाले की गलती होगी। क्या बाबा साहब की कही ये बातें आज सच होती दिख रही है की प्रजातांत्रिक देश में जिन पर जनता विश्वास कर अपनी ओर देश प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपती है वहीं संविधान की प्रतियां घुमा घुमा कर अपने आप को ईमानदार बताने का प्रयास करते है क्या उनका उस वक्त बाबा साहब के बनाए संविधान पर से विश्वास उठ जाता है जो ये गलतियां कर बैठते है ।मतलब साफ है विपक्ष के नेताओं पर जब जब सत्ता किसी मामले पर कार्यवाही करती है तो उन्हे संविधान दिखाई देने लगता है जो खुद सत्ता में रहते संविधान की धज्जियां उड़ाने और मनमानियां करने से बाज नहीं आते है ।

आज जैसे बांग्लादेश में अराजकता आई, पाकिस्तान और श्रीलंका की लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में पड़ते रहती है,जनता की चुनी सरकारों को हटाकर सेना देश को अपने कब्जे में ले लेती है ।कुछ लोग भारत में भी यह प्रयास करते आ रहे हैं। सत्ता पाने के फेर में लोकतंत्र के प्रति आम जनता के मन में संविधान के प्रति आक्रोश पैदा करने का प्रयास देश के साथ वफादारी नही है बल्कि यह गद्दारी की श्रेणी में आता है ।नेताओं को चाहिए सड़क पर हमारे भारतीय प्रजातांत्रिक संविधान की पुस्तिका लहराने की बजाय यदि वो पाक साफ है तो उसी संविधान पर एक मजबूत विश्वास रखे और संविधान में उल्लेखित कानूनों के हिसाब से अपनी लड़ाई लड़े ना की संविधान का अपमान करे क्योंकि उनकी इन्ही हरकतों से जनता का उन पर से विश्वास उठता जा रहा की जिन नेताओं का ही संविधान पर भरोसा नहीं उन नेताओं पर जनता भरोसा क्यों करे।






