सेल के निदेशक कार्मिक, के.के.सिंह की भिलाई इस्पात संयंत्र अधिकारियों संग बैठक: रणनीतिक विषयों पर हुआ व्यापक मंथन…

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सेल के निदेशक (कार्मिक) की भिलाई इस्पात संयंत्र अधिकारियों संग बैठक: रणनीतिक विषयों पर हुआ व्यापक मंथन

भिलाई नगर 14 जुलाई 2025:- स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के निदेशक (कार्मिक)  के.के. सिंह ने 14 जुलाई 2025 को भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ प्रबंधन व विभाग प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक इस्पात भवन में आयोजित हुई, जिसमें कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं)  एस. मुखोपाध्याय, कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन)  ए.के. चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा)  प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन)  पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (खदान)  बी.के. गिरि, कार्यपालक निदेशक (संकार्य)  राकेश कुमार, कार्यपालक निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा) डॉ. रविंद्रनाथ एम., कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (रावघाट)  अरुण कुमार सहित सभी मुख्य महाप्रबंधक उपस्थित थे


इस अवसर पर निदेशक (कार्मिक)  के.के. सिंह ने अपने संबोधन में सेल-भिलाई की समृद्ध विरासत को सहेजते हुए उद्योग में हो रहे तीव्र बदलावों के अनुरूप दक्षता, प्रतिस्पर्धा और सतत सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी क्षेत्रों में लागत-न्यूनता की रणनीतियों को अपनाने तथा न्यूनतम मैनपावर में उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पादन की दिशा में प्रयासों को तीव्र करने की आवश्यकता बताई।  सिंह ने यह भी कहा कि सुरक्षा के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता एवं सहयोगात्मक प्रयासों से ही संयंत्र निरंतर सफलता की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


सिंह ने इसके उपरांत एक अलग बैठक में वरिष्ठ मानव संसाधन अधिकारियों के साथ भी संवाद किया। इस बैठक में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन)  पवन कुमार व मुख्य महाप्रबंधक (एचआर)  संदीप माथुर सहित एचआर विभाग के विभागाध्यक्ष एवं महाप्रबंधकगण व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में  सिंह ने संयंत्र की वर्तमान एवं भावी परियोजनाओं, संविदा कर्मचारियों के कार्यबल प्रबंधन एवं कार्यकुशलता में वृद्धि तथा मानव संसाधन रणनीतियों के समग्र उन्नयन पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए ठोस एवं प्रभावशाली क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि उत्पादन और प्रदर्शन में उच्चतम उपलब्धियों को सामूहिक लक्ष्य के रूप में देखा जाए और उसी दिशा में कार्य किया जाए।


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