सप्रे ने पूरे देश को जोड़ा भारतीय ज्ञान परम्परा से:आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा …सप्रे संग्रहालय भोपाल है ज्ञान तीर्थ, भेंट की गईं ” भारतीय ज्ञान परम्परा” व अन्य पुस्तकें

भिलाई नगर 24 मई 2025:- शिक्षाविद् एवं साहित्याचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा ने पं.माधव राव सप्रे संग्रहालय भोपाल के सांस्कृतिक भ्रमण किया। इस दौरान डॉ. शर्मा का सप्रे संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर के साथ विस्तृत संवाद भी हुआ। साहित्य वाचस्पति विजय दत्त श्रीधर ने डॉ.शर्मा को संग्रहालय का विस्तृत तथा प्रत्यक्ष अवलोकन कराने के साथ “भाषा सत्याग्रह” आदि पुस्तकें भी भेंट कीं।

इस दौरान डॉ. शर्मा ने बताया कि अच्छे मित्र के गुण बताने वाले एक श्लोक से प्रेरित होकर पं.माधव राव सप्रे ने “छत्तीसगढ़ मित्र” नाम से प्रथम हिन्दी मासिक पत्रिका के प्रकाशन का श्रीगणेश किया। यद्यपि ये तब बीच में बंद भी हो गई तथापि विगत अनेक वर्षों से आजतक इसका सफल पुनर्प्रकाशन रायपुर से हो रहा है। डॉ.सुशील त्रिवेदी, डॉ.सुधीर शर्मा और गिरीश पंकज आदि की टीम ज्ञानगंगा के इस भगीरथ प्रयास में लगे हैं।
देश-विदेश के अनेक सफल शैक्षणिक और साहित्यिक भ्रमण कर चुके आचार्य डॉ.शर्मा ने भारतीय ज्ञान परम्परा को लेकर पूरे देश की उच्च शिक्षा संस्थानों में चल रहे विमर्शों के सन्दर्भ में बताया कि पं.माधव सप्रे छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के साथ पूरे भारत वर्ष को भारतीय ज्ञान परम्परा से सम्पन्न करते हैं। उन्होंने लोकमान्य पं.बालगंगाधर तिलक के ‘गीता रहस्य’ और ‘केसरी’ के हिन्दी संस्करण निकाले। सप्रे की प्रेरणा से पं.माखनलाल चतुर्वेदी ने जबलपुर से कर्मवीर का प्रकाशन किया। हिन्दी की पहली कहानी “एक टोकरी भर मिट्टी” के लेखक भी सप्रे हैं।

महाभारत मीमांसा के रचयिता पं.सप्रे के अनुसार समर्थ रामदास के “दासबोध” और तुलसी साहित्य में अद्भुत साम्य है। डॉ. शर्मा ने बताया कि इधर छत्तीसगढ़ में सप्रे पर लगातार वैचारिक आयोजन होते रहे हैं। संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन और छत्तीसगढ़ मित्र रायपुर ने 2016 में ” गीता रहस्य के सौ साल” विषय पर सफल राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की, मुझे अध्यक्षता करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। इधर ज्ञान तीर्थ सप्रे संग्रहालय भोपाल की शोध सामग्री का लाभ लेते हुए देश-विदेश के डेढ़ हजार शोधार्थी एम.फिल, पी-एच.डी.और डी.लिट्. उपाधियाँ प्राप्त कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ.शंकरदयाल शर्मा, पत्रकार-सम्पादक प्रभाष जोशी और राजेन्द्र माथुर, साहित्यकार कमलेश्वर और डॉ.नामवर सिंह आदि ने इस ज्ञान केन्द्र की मुक्तकंठ से सराहना की है।
नई शिक्षा नीति विषयक इस शैक्षणिक प्रवास में डॉ.शर्मा को महर्षि अगस्त्य वैदिक संस्थान भोपाल के अध्यक्ष एवं तुलसी मानस भारती भोपाल के प्रधान संपादक आचार्य पं.प्रभुदयाल मिश्र ने अपनी पुस्तक “भारतीय ज्ञान परम्परा-विविध आयाम” आचार्य डॉ.शर्मा को भेंट की।

यह पुस्तक महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ,संस्कृति विभाग म.प्र. शासन द्वारा प्रकाशित है। उल्लेखनीय है कि भर्तृहरि, विक्रमादित्य, और महाराजा भोजराज आदि का भी भारतीय ज्ञान परम्परा में विशेष योगदान है। इस पुस्तक के लेखक पं.आचार्य पं.प्रभुदयाल मिश्र छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवायें भी दे चुके हैं। मध्य प्रदेश के महाविद्यालयों में लगभग दो लाख विद्यार्थियों को अब तक भारतीय ज्ञान परम्परा से अवगत करवाया जा चुका है। भोपाल में डॉ.महेश शर्मा को 27 देशों की पत्रकारिता पर केन्द्रित, डॉ.जवाहर कर्नावट की पुस्तक ” विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता ” भी प्राप्त हुई।



