धार्मिक आस्था एवं देश की रक्षा के लिए सिख समाज का योगदान अतुलनीय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….. मुख्यमंत्री साय ने 4 वीर बालकों को वीरता सम्मान से किया सम्मानित

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धार्मिक आस्था एवं देश की रक्षा के लिए सिख समाज का योगदान अतुलनीय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री  साय ने 4 वीर बालकों को वीरता सम्मान से किया सम्मानित

रायपुर,26 दिसंबर 2025 :- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज वीर बाल दिवस के अवसर पर अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ सिविल सोसाईटी द्वारा आयोजित वीरता सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर छत्तीसगढ़ प्रदेश के 4 वीर साहसी बालकों को सम्मानित किया जिसमें साहिब फतेह सिंह वीरता पुरस्कार  प्रेमचन्द साहू,साहिबजादा जोरावर सिंह वीरता पुरस्कार कु अंशिका साहू साहिबजादा जुझार सिंह वीरता पुरस्कार कु कांति सिंह, साहिबजादा अजीत सिंह वीरता पुरस्कार  ओम उपाध्याय को प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा साहिबजादों का बलिदान हमेशा लोगो को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में धर्म,आस्था एवं देश की रक्षा के लिए सिख समाज का योगदान अतुलनीय है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा 26 दिसंबर को हम वीर बाल दिवस मनाते हैं। आज के दिन हम दशम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हैं। इतनी छोटी सी उम्र में साहिबजादों ने वीरता और गौरव की जो मिसाल दिखाई, वो अनुकरणीय है। इतनी छोटी आयु में भी वे किसी दबाव में नहीं आए, अपनी आस्था को नहीं छोड़ा, अपनी आस्था के लिए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान किया। वह हमारे लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने आगे कहा कि आज हमें इस बात का गर्व है कि हम नई पीढ़ी को साहिबजादों के बलिदान के बारे में अवगत करा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  ने वर्ष 2022 से वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की। निश्चित रूप से इस पहल से बच्चों में शौर्य जगाने की जो अलख जगाई गई है वह सराहनीय कदम है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने आयोजन के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी की प्रशंसा की एवं सभी साहसी बालकों को शुभकामनाएं दी।

कार्यक्रम को दुर्ग सांसद  विजय बघेल एवं राजनांदगांव सांसद  संतोष पांडेय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ कुलदीप सिंह सोलंकी ने स्वागत भाषण दिया एवं कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दीं।

पुरस्कार पाने वालों में भिलाई के ओम उपाध्याय (साहिबजादा अजीत सिंह अवॉर्ड) शामिल हैं, जिन्होंने कुत्तों के हमले से बच्चों को बचाया। सरगुजा की 7 वर्षीय कांति (साहिबजादा जुझार सिंह अवॉर्ड) ने हाथियों के झुंड के बीच से अपनी छोटी बहन को सुरक्षित निकाला। धमतरी की अंशिका साहू (साहिबजादा जोरावर सिंह अवॉर्ड) ने करंट की चपेट में आई अपनी बहन की जान बचाई, वहीं रायपुर के प्रेमचंद साहू (साहिबजादा फतेह सिंह अवॉर्ड) को डूबते हुए बालक को बचाने के लिए सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने बताया कि सोसाइटी की पहल पर ही प्रधानमंत्री ने 26 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किया। समारोह में सांसद संतोष पांडेय और विजय बघेल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

ओम उपाध्याय कोहका, भिलाई, सम्मान: साहिबजादा अजीत सिंह अवार्ड
खामोश आवाज, पर दहाड़ जैसी हिम्मत: भिलाई की गलियों में जब आक्रामक कुत्तों ने मासूमों को घेरा, तो सन्नाटा पसर गया। लेकिन सुन न पाने वाले ओम उपाध्याय के हौसले ने वह कर दिखाया जो अच्छे-अच्छों के बस में नहीं था। एक कुत्ते ने ओम के हाथ को लहूलुहान कर दिया, पर यह वीर बालक टस से मस नहीं हुआ। दर्द को पीकर ओम तब तक लड़ते रहे जब तक कि शिकारी कुत्ते दुम दबाकर भाग नहीं गए।

कु. कांति, ग्राम मोहनपुर, जिला सरगुजा , सम्मान: साहिबजादा जुझार सिंह अवार्ड
हाथियों के चक्रव्यूह को भेदने वाली कांति: सरगुजा के जंगलों से जब हाथियों का झुंड गांव में घुसा, तो बड़े-बड़े सूरमा भाग खड़े हुए। एक घर में तीन साल की मासूम अकेली रह गई थी। ऐसे में सात साल की कांति काल बनकर आए हाथियों के सामने ढाल बनकर खड़ी हो गई। हाथियों की चिंघाड़ के बीच से गुजरकर वह घर में घुसी और अपनी बहन को सुरक्षित बाहर निकाल लाई।

कु. अंशिका साहू, ग्राम संबलपुर, जिला धमतरी, सम्मान: साहिबजादा जोरावर सिंह अवार्ड
बिजली की रफ्तार से भी तेज दिमाग: धमतरी में जब खेल-खेल में अंशिका की बड़ी बहन बिजली के खुले तार की चपेट में आई, तो यमराज द्वार पर खड़े थे। करंट ने शरीर को जकड़ लिया था। लोग डर के मारे चिल्लाते रह गए, पर नन्हीं अंशिका ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाई। बिना डरे, प्लास्टिक की चप्पल को हथियार बनाया और एक सटीक प्रहार से अपनी बहन को मौत के चंगुल से खींच लिया।

प्रेमचंद साहू,ग्राम रामपुर (डंगनिया), रायपुर, सम्मान: साहिबजादा फतेह सिंह अवॉर्ड
मौत की लहरों को चीरने वाला ‘जल-नायक’: ” रायपुर के तालाब में जब एक पैर फिसला, तो हंसी-खुशी का माहौल मातम में बदलने लगा। एक बालक डूब रहा था और सांसे उखड़ रही थी। प्रेमचंद साहू ने अपनी जान की परवाह किए बिना मौत की लहरों में छलांग लगा दी। गहरे पानी की चुनौतियों को मात देते हुए प्रेमचंद ने डूबते हुए बालक को किनारा दिखाया और उसे नया जीवन दान दिया।

इस अवसर पर क्रेडा अध्यक्ष  भूपेंद्र सवन्नी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग अध्यक्ष  विश्वविजय सिंह तोमर, श्रीरामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर  डॉ  संजीव दवे, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डॉ गिरीश चंदेल,आईएमए अध्यक्ष डॉ नीरज शर्मा,डॉ वर्तिका मिश्रा,वरिष्ठ समाजसेवी  अजय काले, वरिष्ठ शिक्षाविद  संजय जोशी, सहित छत्तीसगढ़ सिविल सोसाईटी के सदस्यगण उपस्थित रहे।


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