हाई कोर्ट ने स्मृति नगर चौकी प्रभारी उप निरीक्षक गुरविंदर सिंह संधू के आचरण व न्यायालय में सुनवाई में उसकी अनाधिकृत मौजूदगी पर डीजीपी से जवाब मांगा…

ट्रांसपोर्टर ने सात पुलिस कर्मियों की मनमानी और निरंकुश कार्यवाही के खिलाफ हाई कोर्ट में लगाई थी याचिका…

भिलाई नगर 16 जनवरी 2026:- बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्मृति नगर पुलिस चौकी के एक मामले में पुलिस महानिदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा जमा करने का आदेश जारी किया है। यह भी आदेश दिया है कि शपथ पत्र जमा करने के पहले ध्यान देना होगा कि चौकी प्रभारी का आचरण, न्यायिक मजिस्ट्रेट की टिप्पणी और परिवादी के जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान चौकी प्रभारी का कोर्ट में अनधिकृत उपस्थिति क्यों थी। कोर्ट ने चौकी प्रभारी की उपस्थिति पर नाराजगी जताई गई थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि कोर्ट में मौजूदगी प्रथम दृष्टया न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास प्रतीत होता है। ऐसे में डीजीपी को अपने जबाव में इसका स्पष्ट विवरण देना होगा। आदेश में लिखा है कि मामले में लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, यह उचित होगा कि महाधिवक्ता स्वयं अगली सुनवाई की तिथि पर उपस्थित रहें।
आदेश की प्रति राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तत्काल सूचना, अनुपालन और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए न्यायालय में ट्रांसपोर्टर सुजीत साव ने याचिका लगाई थी। याचिकाकर्ता ने स्मृति नगर चौकी के प्रभारी गुरविंदर सिंह, सीएसपी भिलाई नगर सत्यप्रकाश तिवारी, हरीश सिंह, धर्मशील यादव, आत्मानंद कोसरे, कौशलेंद्र सिंह और हर्षित शुक्ला को पार्टी बनाया था। ट्रांसपोर्टर की ओर से पैरवी अधिवक्ता अवध त्रिपाठी ने की है। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने पक्ष रखा है। कोर्ट ने 13 जनवरी को आदेश जारी किया है। मामले की सुनवाई 19 जनवरी को होगी।
स्मृति नगर चौकी प्रभारी उप निरीक्षक गुरविंदर सिंह संधू सहित 7 पुलिसकर्मियों की मनमानी और निरंकुश कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
एडवोकेट अवध त्रिपाठी ने बताया कि याचिका किसी विशिष्ट आदेश के विरुद्ध नहीं थी। याचिका प्रतिवादी संख्या 2 गुरविंदर सिंह संधू समेत बाकी 7 पुलिसकर्मियों की मनमानी और निरंकुश कार्रवाई के खिलाफ दायर की गई थी। याचिकाकर्ता को पुलिस हिरासत में यातनाएं दी गईं, जिससे शारीरिक चोटें और गंभीर मानसिक पीड़ा हुई। जो मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं को थर्ड डिग्री की यातनाएं देना, हथकड़ी लगाना और सार्वजनिक रूप से घुमाना केवल परेशान और अपमानित करने के लिए किया गया।
न्यायिक निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए गिरफ्तारी ज्ञापन में उनकी चोटों को जानबूझकर छुपाया गया। याचिकाकर्ता सुजीत के भतीजे ने इससे पहले रिट याचिका संख्या डब्लूपीसीआर संख्या 553/2025 दायर की थी। प्रतिवादी संख्या 2 और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उत्पीड़न और पुलिस अधिकार के दुरुपयोग के समान आरोप लगाए गए थे। उक्त याचिका में कोर्ट ने पहले ही दुर्ग के एसएसपी को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। एसएसपी ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया था।
पुलिस चौकी में मारपीट करने और रात 9:00 बजे जेल में भेजने का है मामला
अक्टूबर 2025 में सुजीत साव परिवार के साथ सूर्या मॉल स्थित पीवीआर सिनेमा में फिल्म देखने गया। इसी दौरान दुर्ग से आई एक महिला ने अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया। इसके बाद सुजीत समेत अन्य लोगों ने महिला और उसके परिवार के साथ मारपीट कर दी थी। शिकायत के बाद पुलिस ने सुजीत साव समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि चौकी में सभी के साथ मारपीट की गई। फिर कोर्ट में शाम 6 बजे पेश किया गया। न्यायालय में सुजीत साव समेत अन्य ने बताया था कि सभी के साथ मारपीट की गई। इसके बाद कोर्ट ने सभी का मुलाहिजा कराने के बाद जेल दाखिल करने का आदेश दिया था। कोर्ट से महज 1 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाने के लिए सभी को पहले चौकी लगाया गया। सभी का जुलूस निकाला गया। फिर सुपेला के सरकारी अस्पताल में मुलाहिजा कराने के बाद रात 9 बजे जेल भेजा गया। सुजीत ने सभी सबूतों के साथ हाईकोर्ट में अपना याचिका लगाई थी।



