“बहुचर्चित सीडी कांड” भूपेश बघेल को झटका सीडी कांड में फिर होगी सुनवाई… 2017 के बहुचर्चित मामले में सेशन कोर्ट में सीबीआई की रिव्यू याचिका मंजूर…

रायपुर 25 जनवरी 2026:- राज्य की राजनीति में हालचाल लाने वाले वर्ष 2017 के बहुचर्चित ‘अश्लील सीडी’ मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मुश्किलें फिर से बढ़ती नजर आ रही हैं। रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें बघेल को इस मामले से दोषमुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया था। सेशन कोर्ट ने सीबीआई की रिव्यू याचिका मंजूर की है। पूर्व सीएम बघेल सहित सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलेगा।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने 24 जनवरी 2026 को दिए आपने आदेश में स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा वर्ष 2024 में बघेल को डिस्चार्ज करने का निर्णय कानून सम्मत नहीं था। इस फैसले के साथ ही अब पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ इस मामले में फिर से न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगा। साथ ही, कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपितों में कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया द्वारा आरोप तय किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया गया है। इन सभी की मुश्किलें बढ़ सकती है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने सेक्स सीडी केस में पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बरी करने के निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। अब सभी आरोपियों के खिलाफ केस चलेगा।
प्रकरण पर अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।
सेक्स सीडी कांड में सीबीआई ने विनोद वर्मा, विजय भाटिया के साथ पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी आरोपी बनाया था। मगर निचली अदालत ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ी राहत देते हुए प्रकरण से उन्हें अलग कर दिया था।
सीबीआई ने पूर्व सीएम को बरी करने के खिलाफ विशेष अदालत में अपील की। इस पर सीबीआई अदालत ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल बरी करने के फैसले को पलट दिया है। उनके खिलाफ भी प्रकरण चलेगा। इस प्रकरण पर 23 फरवरी को सुनवाई होगी।
सीबीआई की एक विशेष
अदालत ने शनिवार को मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 2017 में पूर्व मंत्री राजेश मूणत को कथित तौर पर दर्शाने वाले एक अश्लील वीडियो के प्रसार से संबंधित मामले में बरी कर दिया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपपत्र में बघेल समेत कई आरोपियों को नामजद किया था। सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले का मतलब है कि बघेल को इस मामले में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा, जब तक कि उन्हें उच्चतर अदालत से राहत नहीं मिल जाती।
मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने’ बताया, “इसी कार्यवाही में अदालत ने अन्य आरोपियों कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया द्वारा निचली अदालत के आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ दायर अपील को भी खारिज कर दिया।”
छत्तीसगढ़ पुलिस ने 2017 में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रकाश बजाज द्वारा दायर अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कीं।
बाद में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इन मामलों को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया। सीबीआई ने इस मामले में एक आरोपपत्र और एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया।
सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया था कि पहला मामला 26 अक्टूबर, 2017 को रायपुर के पंडरी थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ इस आरोप पर दर्ज किया गया था कि शिकायतकर्ता (बजाज) को फोन पर एक अज्ञात व्यक्ति ने कहा था कि उस उसके “आका” का एक अश्लील वीडियो है। और धमकी दी थी कि अगर उसकी फिरौती की मांग पूरी नहीं की गई तो वह इसे प्रसारित कर देगा।
अधिकारी के अनुसार, कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष भूपेश बघेल और वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा के खिलाफ 27 अक्टूबर, 2017 को रायपुर के सिविल लाइंस थाने में दूसरा मामला दर्ज किया गया था। इसमें उन पर मूणत के फर्जी अश्लील वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया मंच पर उनकी छवि खराब करने और राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रसारित करने के आरोप लगाए गए थे।
वर्मा और बघेल ने आरोपों से इनकार किया।
यह मामला तब सामने आया जब अक्टूबर 2017 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने वर्मा को उनके गाजियाबाद स्थित आवास से इस मामले में ब्लैकमेल और जबरन वसूली के संदेह में गिरफ्तार किया।
जब वर्मा को पुलिस द्वारा ले जाया जा रहा था, तो उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार उनसे खुश नहीं थी क्योंकि उसे संदेह था कि उनके पास “छत्तीसगढ़ के (तत्कालीन) पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत की एक अश्लील सीडी” थी और कहा कि उन्हें फंसाया जा रहा था। मूणत ने इसे “फर्जी” और चरित्र हनन का प्रयास बताया था।




