भिलाई के सौ बिस्तर हॉस्पिटल की पार्किंग को लेकर फंसा पेंच, जिम्मेदारों के गोल-मोल जवाब, मुख्य सचिव से शिकायत
भिलाई नगर, 22 फरवरी 2026:- स्पर्श मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल कान्ट्रेक्टर कालोनी भिलाई के बेसमेंट में मेनीफोल्ड रूम और आक्सीजन प्लांट संचालन को लेकर पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन द्वारा जांच के निर्देश के साथ ही पार्किंग को लेकर भी बड़ा पेंच फंस गया है। मामले की शिकायत अब मुख्य सचिव विकासशील तक पहुंची है।

बगैर पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित किए इस तीन मंजिला 100 बिस्तर अस्पताल के लायसेंस को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं क्योंकि नर्सिंग होम एक्ट के तहत बिना पार्किंग व्यवस्था के किसी भी अस्पताल का पंजीयन हो ही नहीं सकता। नियम यह भी कहता है कि पार्किंग व्यवस्था अस्पताल परिसर में ही होनी चाहिए। नगर निगम अधिनियम के तहत किसी भी काम्प्लेक्स अथवा हॉस्पिटल की पार्किंग के लिए बेसमेंट ही उपयुक्त जगह है लेकिन स्पर्श हास्पीटल की बेसमेंट में पार्किंग की जगह प्लांट का संचालन किया जा रहा है।

दरअसल जनवरी महीने हॉस्पिटल की पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद कलेक्टर को दी गई शिकायत और जन सूचना अधिकार के तहत पीड़ित प्रिया निषाद और अन्य द्वारा मांगी गई जानकारी में मिल रहे गोल-मोल जवाब इस मामले को तुल देने लगे हैं। आस-पास के लोगों का कहना है कि हॉस्पिटल पहुंचने वाले उनके घर या दुकान के सामने वाहन पार्क करते हैं जिससे रोज विवाद के हालात बन रहे हैं।

पार्किंग व्यवस्था हॉस्पिटल का आंतरिक मामला – सीएचएमओ
आरटीआई के तहत नर्सिंग होम एक्ट पंजीयन के दौरान हास्पीटल की पार्किंग दस्तावेज अथवा नक्शा की जानकारी मांगे जाने पर संबंधित अधिकारियों ने इसे हास्पीटल का निजी मामला बता दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कलेक्टर से 22 जनवरी 2026 को हास्पीटल की पार्किंग विवाद पर की गई जनशिकायत की जांच को प्रक्रियाधीन बताते हुए लिखित जवाब दिया है कि अभिलेखों के प्रकटीकरण किए जाने से जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना है। प्रथम अपील दायर करने पर 19 फरवरी को सीएचएमओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि पार्किंग व्यवस्था हॉस्पिटल का आंतरिक मामला है।

स्थानीय व्यापारी और रहवासियों की शिकायत
हॉस्पिटल के सामने और अगल-बगल के व्यवसायियों और रहवासियों ने 22 जनवरी को स्पर्श हास्पिटल में पार्किंग व्यवस्था के न होने की समस्या को विकराल बताते हुए मनोज मिश्रा, वीणा साहू, शिवनंदन कुमार, पुष्पेंद्र, सन्नी पासवान सहित अन्य द्वारा कलेक्टर से शिकायत की गई। जिसमें बताया गया कि स्पर्श हास्पिटल के सामने उनकी दुकाने एवं निवास है, वो कई वर्षों से हास्पिटल प्रबंधन से निवेदन कर रहे हैं लेकिन वो हमारी परेशानी को न तो समझ रहा है, न ही ध्यान दे रहा है। हमारी दुकानों के सामने, निवास के सामने रोज दुपहिया और चार पहिया वाहन हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों एवं उनके रिश्तेदारों के खड़े हो जाते हैं। दुकान में आने वाले ग्राहकों के वाहन खड़े करने के लिए जगह ही नहीं बचती। रोज वाहन खड़े करने वालों से बहस एवं झगड़ा होता है। शिकायतकर्ता वाहन अपने निवास या अपनी दुकान के सामने खड़े नहीं कर पाते हैं।

शिकायत में बताया गया कि हास्पीटल प्रबंधन ने बेसमेंट में पार्किंग की जगह दूसरे उपयोग के लिए स्थायी पक्के निर्माण कर लिए हैं, जिससे वहाँ दो पहिया, चार पहिया वाहनों की पार्किंग मुश्किल हो गई है। स्पर्श हास्पिटल से 500 मीटर की दूरी पर किसी धर्मेन्द्र अरोरा और दीपक छाबड़ा की जमीन पर स्पर्श प्रबंधन ने कब्जा कर गाड़ियां पार्क करने का प्रयत्न किया है। इस पार्किंग स्थल पर रोज जूतम-पैजार हो रही है। स्पर्श हास्पिटल का सारा स्टाफ जमीन मालिक से लड़ने वहां पहुंच जाता है।

विवादित जमीन पर एंबुलेंस पार्किंग बैनर
इस हास्पिटल के पास अपनी एंबूलेंस खड़ी करने की जगह नहीं है, वह इस विवादित जमीन पर स्पर्श एंबूलेंस पार्किंग का बैनर लगाकर वहाँ अपनी एंबूलेंस खड़ी कर रहा है जबकि नियमानुसार एंबुलेंस हास्पीटल परिसर में ही खड़ी होना आवश्यक है।

क्या कहता है नियम
किसी भी 100 बिस्तर अस्पताल के लिए नर्सिंग होम एक्ट, क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और नगर निगम के नियमों के तहत पार्किंग के नियम अत्यंत जरूरी और अनिवार्य हैं। पार्किंग की कमी के कारण अस्पताल का लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। 100 बिस्तर अस्पताल के लिए एक निर्धारित पार्किंग क्षेत्र लाइसेंस लेने के लिए सबसे प्रमुख शर्त है।


