कोडिन कफ सिरप की तस्करी करने वाले 2 आरोपियों को मिली 15 साल की जेल

रायपुर 11 दिसंबर 2025:- विशेष दांडिक प्रकरण (एन.डी.पी.एस.) क्र. 12/2021 में छत्तीसगढ़ राज्य के विरुद्ध अभियुक्त अभिषेक सिंह ठाकुर और शहबाज खान को स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act) की धारा 21 (C) के तहत दोषी पाया गया है।

विशेष न्यायधीश पंकज सिन्हा की अदालत में न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को 15-15 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1,50,000-1,50,000 रुपये का अर्थदंड देने का निर्णय सुनाया। घटना दिनांक 29 नवंबर 2020 की रात 23:10 बजे की है। थाना आजाद चौक, रायपुर के अंतर्गत ईदगाह हिंद स्पोर्टिंग मैदान के पास पुलिस को मुखबीर सूचना मिली कि अभियुक्तगण– अभिषेक सिंह ठाकुर, सज्जाद हुसैन, शहबाज खान और शाहरूख बेग – योजना बद्ध तरीके से मादक पदार्थ एवं नशीली औषधियों का व्यवसायिक स्तर पर विक्रय कर रहे हैं।
सूचना के अनुसार, अभिषेक सिंह ठाकुर के पास क्यूरेक्स कफ सिरप 11 शीशी और ओनरेक्स कफ सिरप 85 शीशी, कुल 9600 एमएल कोडिन एवं क्लोरोफेनीरेमाइन युक्त सिरप रखे हुए थे। वहीं शहबाज खान के पास ओनरेक्स कफ सिरप 109 शीशी (10900 एमएल) रखी हुई मिली। यह दोनों मात्रा व्यवसायिक स्तर की मानी गई।
सूचना के आधार पर उपनिरीक्षक अशोक मिश्रा ने अपने हमराह स्टाफ आरक्षक तौसिन नेगी और हरजीत सिंह के साथ रेड कार्रवाई की। अभियुक्तों को तलाशी के दौरान चेतावनी देकर उनके अधिकारों से अवगत कराया गया। तलाशी में कोई वैध लाइसेंस या अनुज्ञा पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। पुलिस और स्वतंत्र साक्षियों की उपस्थिति में सभी शीशियों की जप्ती की गई। प्रकरण में अभियुक्त सज्जाद हुसैन और शाहरूख बेग अदालत में अनुपस्थित रहने के कारण फरार घोषित किए गए और उनके विरुद्ध बेमियादी गैरजमानती वारंट जारी किया गया।
अभियुक्त अभिषेक सिंह ठाकुर और शहबाज खान को 30 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया। अभिषेक सिंह ठाकुर 130 दिन और शहबाज खान 120 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रहे। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने अभियुक्तों के खिलाफ तलाशी, जप्ती और रेड कार्यवाही को यथार्थ और वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित किया। जप्त पदार्थ का परीक्षण वैज्ञानिक अधिकारी एवं सहायक रासायनिक परीक्षक द्वारा किया गया, जिसमें कोडिन और क्लोरोफेनीरेमाइन की उपस्थिति पाई गई। बचाव पक्ष इस तथ्य को चुनौती नहीं दे सका कि यह मादक औषधि अभियुक्तों के आधिपत्य में नहीं थी। न्यायालय ने अभियुक्तों की दोषसिद्धि पर विचार करते हुए उन्हें 15 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 1,50,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
जुर्माना अदा न होने की स्थिति में तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने अभियुक्तों द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताए गए दिनों को सजा में शामिल करने का आदेश भी दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि रेडकर्ता अधिकारी अशोक मिश्रा ने पूरी कार्रवाई कानूनी प्रावधानों के तहत निष्पक्ष और प्रमाणिक रूप से की। अभियुक्तों के पास किसी प्रकार की वैध अनुमति नहीं थी और उन्हें व्यवसायिक स्तर पर नशीली औषधियां रखने का दोष सिद्ध हुआ। इस निर्णय से यह संदेश गया कि एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत मादक पदार्थों के अवैध व्यवसाय पर कानून सख्ती से लागू है। अभियुक्तों के खिलाफ वैज्ञानिक परीक्षण और स्वतंत्र साक्षियों की उपस्थिति ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित की। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्तों को अपने कब्जे में पाई गई औषधियों की वैधता साबित करने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे उनके अपराध की गंभीरता और प्रमाणिकता स्पष्ट होती है। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के प्रस्तुत साक्ष्यों को यथार्थ और संदेह से परे प्रमाण माना। इस प्रकरण में अभियुक्तों की भारी मात्रा में कोडिन युक्त कफ सिरप रखने और व्यवसायिक स्तर पर विक्रय करने की प्रवृत्ति को देखते हुए कठोर सजा सुनाई गई। यह निर्णय मादक पदार्थों के अवैध व्यापार के खिलाफ कड़े कानूनी संदेश के रूप में माना जा रहा है।


