भिलाई नगर 6 नवंबर 2023 :- वैशाली नगर विधानसभा में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर चल रही है बाकी खड़े अन्य प्रत्याशी अब तक मतदाताओं पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाए हैं कांग्रेस के कद्दावर राजेंद्र सिंह अरोरा व कांग्रेस नेत्री तुलसी साहू के भाजपा में जाने से कांग्रेस का समीकरण पूरी तरह बिगड़ चुका है इन दोनों की वजह से भाजपा को फायदा मिलता दिख रहा है भाजपा और कांग्रेस को गैर छत्तीसगढ़िया वोट बैंक पर सभी प्रत्याशियों की नजरें टिकी हुई है। इसके साथ ही कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी इस निर्णायक माने जाने वाले वोट बैंक को अपने – अपने पक्ष में साधने की कोशिश में लग गए हैं। इस सीट पर एक बार हुए उप चुनाव में अंदरुनी स्तर पर छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी के खिलाफ हवा चल चुकी है। लेकिन इस बार कांग्रेस व भाजपा ने छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी उतारकर चुनावी समीकरण में लगभग उलझन सी पैदा कर दी है। वही जोगी कांग्रेस के डॉ. दिवाकर भारतीय, भाजपा की बागी संगीता केतन शाह सहित अन्य उम्मीदवार का मतदाताओं पर कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर नजर आ रही है चुनाव परिणाम को लेकर सट्टे का बाजार गर्म है।

वैशाली नगर में इस बार कांग्रेस ने जहां मुकेश चन्द्राकर को प्रत्याशी बनाया है। वहीं भाजपा ने रिकेश सेन पर दांव खेला है। दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने इस बार छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी उतारकर वैशाली नगर विधानसभा में नया समीकरण सामने रख दिया है। जबकि इससे पहले यहां पर गैर छत्तीसगढ़िया को ही विधायक बनने का मौका मतदाताओं ने दिया है। ऐसे में दोनों ही प्रमुख पार्टी से इस बार छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी उतारे जाने से गैर छत्तीसगढ़िया वोट बैंक के भावी रुख पर सभी की निगाहें टिकी हुई है। वैशाली नगर में गैर छत्तीसगढ़िया वोट बैंक नतीजा को प्रभावित करने का माद्दा रखता है।


यही कारण है कि जितने भी प्रत्याशी और उनके चुनावी रणनीतिकार हैं उन सभी के द्वारा इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में गुणा भाग लगाया जा रहा है।
गौरतलब रहे कि वर्ष 2009 के उपचुनाव में यहां पर भाजपा ने जागेश्वर साहू को प्रत्याशी बनाया था। जबकि कांग्रेस ने अब दिवंगत हो चुके भजन सिंह निरंकारी को चुनाव मैदान में उतारा था। जागेश्वर साहू छत्तीसगढ़िया थे जबकि भजन सिंह निरंकारी गैर छत्तीसगढ़िया थे।
इस उपचुनाव के दौरान दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टी की रीति नीति और उनके प्रत्याशियों की योग्यता के बजाय छत्तीसगढ़िया और गैर छत्तीसगढ़िया का मुद्दा अंदरुनी स्तर पर छाया रहा। कहा तो यहां तक गया कि वैशाली नगर विधानसभा में छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी को विधायक चुनने से भविष्य के लिए बहुसंख्यक गैर छत्तीसगढ़ियों के लिए दावेदारी का रास्ता बंद हो जाएगा। चुनाव परिणाम भजन सिंह निरंकारी के पक्ष में आने से इस बात में दम नजर आया।

जबकि उस वक्त प्रदेश में भाजपा की सरकार थी।
यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि भाजपा ने वैशाली नगर से एक बार हुए उपचुनाव में ही छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी पर दांव खेला था, जिसमें उसे पराजय का सामना करना पड़ा। जबकि भाजपा को बाकी के आम चुनाव में गैर छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी उतारने का फायदा मिला। भाजपा प्रत्याशी के रूप में सुश्री सरोज पाण्डेय एक बार और दिवंगत विद्या रतन भसीन ने दो बार वैशाली नगर से विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया।
हालांकि अब तक हुए सभी चुनाव में कांग्रेस ने भी गैर छत्तीसगढ़िया को प्राथमिकता देते हुए बृजमोहन सिंह, भजन सिंह निरंकारी और बदरुद्दीन कुरैशी को वैशाली नगर से चुनाव लड़ाया। लेकिन कांग्रेस को सफलता तभी मिली जब उप चुनाव में भाजपा का प्रत्याशी छत्तीसगढ़िया था। बाकी के चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा को ही प्राथमिकता देते हुए मतदान किया। लेकिन इस बार कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही छत्तीसगढ़िया प्रत्याशी उतारा है।





