विश्व पर्यावास दिवस 2025… द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा द्वारा विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर एक तकनीकी परिचर्चा का आयोजन इंजीनियर्स भवन में किया गया….
भिलाई नगर 10 अक्टूबर 2025:- द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा द्वारा विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर एक तकनीकी परिचर्चा का आयोजन भिलाई में सिविक सेन्टर स्थित इंजीनियर्स भवन में किया गया ,कार्यक्रम में तारण प्रकाश सिन्हा , आयुक्त मनरेगा, छत्तीसगढ़़ शासन, डा. अनीता सावंत, क्षेत्रीय अधिकारी , छत्तीसगढ़़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, दुर्ग-भिलाई , सूर्यभान सिंह ठाकुर , संयुक्त संचालक , नगर तथा ग्राम निवेश, दुर्ग , विशिष्ट अतिथि वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए।

इस वर्ष विश्व पर्यावास दिवस के विषय “संकट के शहरी समाधान” पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. विवेक अग्निहोत्री, सहायक प्राध्यापक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर ने व्याख्यान दिया | कार्यक्रम की अध्यक्षता द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई स्थानीय केंद्र के चेयरमैन पुनीत चौबे ने की।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की भिलाई शाखा के सचिव बसंत साहू ने अतिथियों का स्वागत करते हुए द इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स की गतिविधियों और उद्देश्यों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि वक्ता तारण प्रकाश सिन्हा, आयुक्त मनरेगा, छत्तीसगढ़ शासन ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत के इतिहास में नगरीय सभ्यता प्राचीन काल से ही बेहतरीन और समृद्ध रही है | उन्होंने 5000 वर्ष पूर्व की सिन्धु घाटी सभ्यता का उदाहरण देते हुए कहा कि यह प्राचीन भारत की उस काल की सबसे आधुनिक और सुव्यवस्थित नगर बसाहट थी जिसे आज की नगरीय योजनाओं की तुलना की जा सकती है | उन्होंने कहा की उस काल का जल प्रबंधन तथा अपशिष्ट जल प्रबंधन बहुत उन्नत था, जिसमें घरों की नालियों को भूमिगत सार्वजनिक नालियों से जोड़ा जाता था, जिन्हें पकी ईंटों से बनाया जाता था और ढककर रखा जाता था|

सिन्हा ने विश्व पर्यावास दिवस के विषय संकट के शहरी समाधान को प्राचीन भारत के गुजरात स्थित धौलाविरा शहर में पुरात्विदों द्वारा स्लम बस्ती उपस्थिति तथा उस काल में उसके सुव्यवस्थित प्रबंधन की चर्चा करते हुए कहा कि प्राचीन भारत में शहरी समस्याओं के समाधान की सकारात्मक व्यवस्था थी | उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्या के काल में गुजरात के जूनागढ़ की झील की स्थापना तथा तत्पश्चात् उस पर आये संकटों का तात्कालीन शासकों द्वारा सकारात्मक समाधान को आज के आधुनिक काल से जोड़ते हुए कहा कि हम आज विश्व पर्यावास दिवस 2025 में जो बातें कर रहे हैं वह प्राचीन भारत के उस काल में भी प्रासंगिक थी | श्री सिन्हा ने कहा कि नगरीय प्रशासन व्यवस्था भारतीय राजनैतिक व्यवस्था में भी महत्त्वपूर्ण रही है| उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरु प्रयागराज,सरदार वल्लभ भाई पटेल अहमदाबाद, बिधान चन्द्र रॉय कोलकाता तथा डा राजेंद्र प्रसाद पटना में म्युनिसिपल अध्यक्ष रहे |

श्री सिन्हा ने कहा की अंग्रेजों के काल में उनके निज स्वार्थ की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था तथा नगरीय व्यवस्था बिगड़ी तथा शहरों का अनियोजित विकास हुआ जिसे आज़ादी के बाद से सुधार करने का प्रयास किया गया | श्री सिन्हा ने नगरीय नियोजन एवं योजना में विशेषज्ञों की कमी पर चिंता व्यक्त की तथा उसे सुदृढ़ बनाने पर बल दिया |
विशिष्ट अतिथि वक्ता डॉ. अनीता सावंत क्षेत्रीय अधिकारी , छत्तीसगढ़़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, दुर्ग-भिलाई ने अपने उद्बोधन में कहा कि शहरों में वायु प्रदुषण के मुख्य कारक वाहनों एवं उद्योगों द्वारा उत्सर्जन है | उन्होंने भारत सरकार की पहल राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनकेप) जिसे केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2019 में प्रारंभ किया गया था के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी । उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य गैर-प्राप्ति शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना था जिसमे छत्तीसगढ़़ के भिलाई ने 2017-18 के आधार वर्ष की तुलना में पीएम10 के स्तर में 15 % से अधिक की कमी हासिल की है | डॉ. अनीता सावंत ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में ई-कचरा , जैव-चिकित्सा अपशिष्ट का प्रबंधन एक चुनौती है और इस दिशा में छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा स्वीकृत जैव-चिकित्सा अपशिष्ट निष्पादन संयंत्र है | उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट से बायो गैस बनाने हेतु संयंत्र स्थापना की भी पहल हुई है तथा इस दिशा में कार्य प्रगति पर है |

डॉ. अनीता सावंत ने कहा कि शहरों को स्वच्छ, सुन्दर तथा प्रदूषण मुक्त बनाने में सभी अपना योगदान दें तभी हम भारत के हर शहर को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप बना पायेंगे |
विशिष्ट अतिथि वक्ता श्री सूर्यभान सिंह ठाकुर, संयुक्त संचालक , नगर तथा ग्राम निवेश, दुर्ग ने अपने प्रस्तुतीकरण में भारत के विकास हेतु पांच वर्षीय योजना के इतिहास की चर्चा करते हुए बताया कि जोसफ स्टॅलिन द्वारा सोवियत यूनियन में सन 1928 में पहली पांच वर्षीय योजना प्रस्तुत की थी तथा भारत में पहली पांच वर्षीय योजना सन 1951 में बनी | उन्होंने शहरी योजना एवं उससे जुड़े प्रमुख नियम तथा कानूनों की विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की|
सूर्यभान सिंह ठाकुर ने नगर नियोजन (टाउन प्लानिंग) तथा उसके विभिन्न अवयव तथा प्रकार जैसे शहरी योजना, ग्रामीण योजना, क्षेत्रीय योजना, राष्ट्रीय योजना, विकास योजना आदि को समझाया | उन्होंने कहा कि आज जिस गति से शहरी आबादी में वृद्धि हो रही है तथा उनका विस्तार हो रहा है उसको देखते हुए भारत में “टाउन प्लानिंग इंस्टीट्यूट्स” की संख्या में बढो़त्तरी पर बल दिया। सूर्यभान सिंह ठाकुर ने सभी से आग्रह किया कि वह अवैध प्लाट न खरीदें क्योंकि इससे न केवल शहर की विकास योजना बाधित होती है अपितु व्यक्ति को भी ढेर सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है |
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. विवेक अग्निहोत्री सहायक प्राध्यापक एन आई टी रायपुर ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि पिछली दो शताब्दियों में में तकनीकी प्रगति बहुत तेजी से हुई है| उन्होंने बताया कि इस दौरान हम स्टीम इंजन और टेलीग्राफ मशीन के युग से मोबाइल, इन्टरनेट और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस तक पहुँच तो गए लेकिन इसका दूसरा स्वरूप हमारी पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति है | डॉ. विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि जिस गति से पृथ्वी के तापमान में इजाफा हो रहा है वह भूमंडल में भविष्य में जीवन के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि यदि हमने अपनी जीवन शैली में परिवर्तन नहीं लाया और अपने आप को वास्तविक जरूरतों तक सीमित नहीं किया तो स्थिति भयावह होगी। डॉ. विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि हमें अपनी उर्जा जरूरतों, परिवहन साधनों, खान पान आदि में बदलाव लाना होगा तभी हम अपने शहरों और गावों को बचा पायेंगे। उन्होंने कार्बन फुट प्रिंट्स में कमी लाने पर बल दिया।
हृदय मोहन, पूर्व कार्यपालक निदेशक सेल एवं लेखक ने शहरी समाधान और जन भागीदारी तथा चीन एवं भूटान में शहरों के नियोजन और विकास के बारे में अपने विचार रखे।
के. प्रवीण, महाप्रबंधक, पर्यावरण प्रबंधन विभाग , भिलाई इस्पात संयंत्र ने उपस्थित श्रोताओं के लिए रोचक क्विज का संचालन किया तथा आवास और शहरी व्यवस्था से जुड़े प्रश्न पूछे |
कार्यक्रम में हृदय मोहन, पूर्व कार्यपालक निदेशक सेल, इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ताम्रकार, आई आई पी ई की छत्तीसगढ़ चैप्टर के सचिव पी के नियोगी, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) भिलाई शाखा के सदस्य, इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के सदस्य , राज्य शासन, सेट/सेल भिलाई , भिलाई इस्पात संयंत्र, एन एस पी सी एल , ए सी सी, जे के लक्ष्मी सीमेंट के अधिकारी और भिलाई दुर्ग के विभिन्न महाविद्यालयों के संकाय सदस्य एवं छात्र छात्रा उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विक्की कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यकारणी सदस्य अरविन्द रस्तोगी ने दिया |


